बीएस बातचीत
इंडिया एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) ने इस साल अपना गैस एक्सचेंज शुरू करने के बावजूद बिजली क्षेत्र में नए उत्पाद उतारे हैं। ज्योति मुकुल के साथ बातचीत में एक्सचेंज के कार्यकारी चेयरमैन और मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) एसएन गोयल ने बिजली क्षेत्र में मांग वृद्घि पर चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:
देश में बिजली की दैनिक मांग कोविड-19 से पूर्व के स्तर को पार कर रही है तब बिजली की मांग को लेकर आपका क्या अनुमान है?
2021-22 में मांग 7 से 8 फीसदी की तीव्र गति से बढ़ेगी। मांग औद्योगिक राज्यों के साथ साथ पूर्वी और उत्तर पूर्व राज्यों में बढ़ रही है। सरकार वितरण क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की उद्घार पैकेज लेकर आई है। उपभोक्ताओं को विकल्प देने का मतलब है कि इस क्षेत्र में कई आपूर्तिकर्ता होंगे। यदि प्रतिस्पर्धा होगी तो वहां बाजार का तंत्र खड़ा होगा। यह स्थिति खुदरा के मोर्चे पर भी होगी। खुदरा विक्रेता बिजली की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगें और लोड शेडिंग कम होगी। इससे बिजली की मांग बढ़ेगी। आपूर्ति के मोर्चे पर देश में अतिरिक्त क्षमता है। इससे पहले हमें कोयला आपूर्ति की चुनौतियों से जूझना पड़ता था लेकिन इस साल वैसी कोई दिक्कत नहींं है। कोयले की ई-नीलामी की कीमत अधिसूचित कीमत से 50-60 फीसदी अधिक हुआ करती थी। इस साल यह अधिसूचित कीमत से महज 5 फीसदी अधिक है।
ट्रेडिंग की जाने वाली बिजली की हिस्सेदारी अभी भी बहुत कम है। मांग को पूूरा करने में भविष्य में इसकी कितनी हिस्सेदारी होगी?
वितरण कंपनियों ने 90 से 92 फीसदी मांग को पूरा करने के लिए दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौता (पीपीए) किया है। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि मांग के एक अच्छे खासे हिस्से का पहले ही उपयोग हो रहा है। राज्यों की जितनी मांग पूरी नहीं हो पा रही है उतने के लिए वह एक्सचेंजों के पास आते हैं। यह मांग हमेशा या सालों भर नहीं होती है। कुछ राज्यों में यह जरूरत पांच से छह महीनों के लिए होती है जिसके लिए वे लंबी अवधि का बिजली समझौता नहीं करना चाहते हैं। लघु अवधि का विद्युत बाजार 3.5 से 4 फीसदी हुआ करता था लेकिन इस साल इसमें जबरदस्त उछाल आई है। कोविड-19 के बावजूद हमारे शेयर में करीब 5-5.5 फीसदी की उछाल आई है। देश की बिजली मांग 1,400 अरब यूनिट है और यदि मांग में 6 से 7 फीसदी की वृद्घि होती है तो मांग में 84 अरब यूटिन का इजाफा होगा। इसके एक बड़े हिस्से की पूर्ति ट्रेडिंग के जरिये की जाएगी।
बिजली के सीमा पार व्यापार के लिए किस प्रकार की तैयारी कर रहे हैं?
सरकार ने फरवरी में सीमा पार बिजली लेनदेन के लिए प्रक्रिया जारी की थी। यह एक्सचेंज पर एक महीने में शुरू हो जाएगी। यह सौदा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ किया जाएगा जिनके साथ हमारा पहले से ही पारेषण नेटवर्क मौजूद हैं। इस तरह के लेनदेन के लिए जरूरी अपनी व्यवस्था के साथ हम तैयार हैं।
क्या सीमा पार व्यापार के लिए आपको कुछ पक्षों के साथ समझौता करने की जरूरत है?
एक दिन पूर्व के बाजार में हमारे पास रोजाना 700-800 भागीदार और करीब 200 विक्रेता होते हैं। इसलिए, पर्याप्त तरलता है। तीन अतिरिक्त साझेदार होंगे जो कि बांग्लादेश, नेपाल और भूटान होंगे।
आपके नए बिजली क्षेत्र उत्पादों में कितनी मात्रा है?
हमने 1 जून से रीयल-टाइम मार्केट ट्रेडिंग शुरू की। पहले यह रोजाना 2-2.5 करोड़ यूनिट हुआ करता था लेकिन अब यह 4-4.5 करोड़ यूनिट है। बहुत अच्छी तरलता है। औसत बिक्री 4-5 करोड़ यूनिट है। हम और अधिक साझेदारी पर पर विचार कर रहे हैं।