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ऑटो बिक्री-घटती रफ्तार

Last Updated- December 07, 2022 | 4:42 PM IST

फिलहाल जब तक ब्याज दरों में कोई सुधार नहीं होता है तब तक पैसेंजर कार की बिक्री में कोई बढ़त होने की संभावना कम ही है।


जुलाई के महीनें में कार की बिक्री में 1.7 फीसदी की कमी आई जिसमें बड़ी हिस्सेदारी इंडिका मॉडल की रही। जिसकी बिक्री में 27 फीसदी की कमी देखी गई। हालांकि दूसरे अन्य मॉडल की मांग भी बेहतर नहीं रही। स्विफ्ट और आई टेन ब्रिस्क बिजनेस करते दिखाई दिए।

पिछले महीनें में वाहनों की बिक्री का वॉल्यूम में काफी तेज गिरावट देखी गई। यूटीलिटी वाहनों की बिक्री जो अप्रैल से जून के बीच 24 फीसदी रही थी, में भी जुलाई के महीनें में 5.77 फीसदी की गिरावट देखी गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा के वॉल्यूम में भी जुलाई के महीनें में आठ फीसदी की कमी देखी गई। काफी कम लो बेस -4.38 फीसदी पर मध्यम और भारी वाहनों की बिक्री में 5.45 फीसदी की गिरावट देखी गई।

जून तक यह हालात इतने खराब नहीं थे, लेकिन जुलाई का महीना सभी ऑटो कंपनियों के लिए खराब रहा। आईशर का वॉल्यूम 48 फीसदी गिरा। टाटा मोटर्स के प्रबंधन ने हाल में ही कहा था कि हालातों के बदतर होने के बावजूद सीवीस की मांग में कमी नहीं देखी गई थी।

ऊंची ब्याज दरों और डीजल की कीमतों की वजह फ्लीट ऑपरेटरों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है जिसकी वजह है कि मांग में कमी आना। हालांकि दुपहिया वाहनों ने हवा के विपरीत काम किया और जुलाई के महीनें में उनकी बिक्री 22 फीसदी ज्यादा रही।

हालांकि जून की तिमाही दुपहिया वाहन निर्माताओं के लिए खास नहीं रहा क्योंकि उनका वॉल्यूम इस तिमाही में सिर्फ 7.9 फीसदी ज्यादा रहा। इन सबके बीच हीरो होंडा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। मौजूदा बाजार मूल्य 827 रुपए पर कंपनी के स्टॉक का कारोबार वित्त्तीय वर्ष 2009 में अनुमानित आय से 14 गुना केस्तर पर हो रहा है। जबकि दूसरे स्टॉक का कारोबार 10 से 12 गुना के स्तर पर हो रहा है।

एफएमसीजी-बेहतर प्रदर्शन

बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स ने इस साल की शुरुआत से बाजार को आउटपरफार्म किया है। एफएमसीजी इंडेक्स में सेंसेक्स की 24 फीसदी की गिरावट की तुलना में महज सात फीसदी की गिरावट आई है।

यह आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि एफएमसीजी कंपनियों ने चुनौतीपूर्ण भरे माहौल में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों की टॉपलाइन ग्रोथ जून की तिमाही में कीमतों की बढ़ोतरी और मिक्स प्रोडक्ट की वजह से अच्छी रही। मॉर्गेन स्टेनली द्वारा किए गए सैंपल सर्वे के अनुसार इन कंपनियों का राजस्व 20 से कम रहा।

3,504 करोड़ की नेस्ले ने इस तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया और उसकी बिक्री 23 फीसदी ज्यादा रही जबकि हिंदुस्तान यूनीलीवर की बिक्री 21 फीसदी ज्यादा रही। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी इतनी पर्याप्त नहीं रही कि लागत में होने वाली वृध्दि से कंपनी को होने वाले नुकसान से बचा जा सके। इसतरह ग्रास मार्जिन और ऑपरेटिंग मार्जिन दोनों कम रहे।

जैसे कोपरा की कीमतें 30 फीसदी तक बढी ज़िससे 1,907 करोड़ की मैरिको का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 1.5 फीसदी कम रहा। इसके बावजूद कंपनी ने अपने उत्पादों में पांच से 15 तक की बढ़ोतरी की जिससे कंपनी को अपने राजस्व को 28 फीसदी बढाने में मद्द मिली।

गोदरेज कंज्यूमर ने भी कीमतों में बढ़ोतरी की लेकिन एडवरटाइजिंग पर 2.1 फीसदी ज्यादा खर्च की वजह से ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में 4.1 फीसदी की गिरावट आई और यह 13.7 फीसदी केस्तर पर आ गया। नेस्ले भी इस चलन को तोड़ न सका और उसके गेंहू और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की और ऑपरेटिंग मार्जिन 0.7 फीसदी कम रहा।

हालांकि वे इसका मुयायना जरुर करेंगी कि कीमतों में बढ़ोतरी के बाद वॉल्यूम पर कितना असर पड़ा है। नेस्ले जैसे ब्रांड जिनके सब्सिटयूट ही हैं, की बिक्री बेहतर रहनी चाहिए। मौजूदा बाजार मूल्य पर नेस्ले का कारोबार वित्त्तीय वर्ष 2009 में अनुमानित आय से 29 गुना के स्तर पर हो रहा है। जबकि एचयूएल का कारोबार 26 गुना के स्तर पर और गोदरेज का कारोबार 17.5 फीसदी के स्तर पर हो रहा है।

First Published - August 12, 2008 | 11:28 PM IST

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