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Indian IT: बड़े टेक दिग्गज खुद कर रहे निवेश, क्या घटेगा भारतीय कंपनियों का काम? ब्रोकरेज ने बताई असली तस्वीर

AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च के बीच ब्रोकरेज ने वैल्यूएशन घटाए, TCS और HCL Tech की रेटिंग ‘Buy’ से ‘Hold’ की

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- February 26, 2026 | 12:45 PM IST

दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ऐसी लहर उठी है जिसने टेक इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। डेटा सेंटरों की रफ्तार तेज हो गई है, चिप्स की मांग आसमान छू रही है और क्लाउड कंपनियां रिकॉर्ड निवेश कर रही हैं। लेकिन इस तेजी के बीच भारतीय आईटी सेक्टर के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती दिख रही हैं। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताज़ा रिपोर्ट यही तस्वीर पेश करती है।

हाइपरस्केलर कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी क्लाउड कंपनियों की कमाई में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज हुई है। AWS की आय 35.6 अरब डॉलर रही, जो सालाना आधार पर 24% ज्यादा है। माइक्रोसॉफ्ट के इंटेलिजेंट क्लाउड कारोबार की कमाई 32.9 अरब डॉलर रही और इसमें 29% की बढ़त दर्ज हुई, जबकि Azure की ग्रोथ 39% रही। गूगल क्लाउड ने सबसे तेज़ रफ्तार दिखाई और उसकी कमाई 17.7 अरब डॉलर पहुंच गई, जो 48% ज्यादा है। साफ है कि AI की मांग इन कंपनियों के लिए बड़ा इंजन बन गई है।

कैपेक्स की रफ्तार ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट बताती है कि 2026 में ये चार बड़ी टेक कंपनियां मिलकर करीब 630 अरब डॉलर पूंजीगत खर्च कर सकती हैं। यह 2025 के लगभग 390 अरब डॉलर से 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक तिमाही में ही 37.5 अरब डॉलर खर्च किए। अमेज़न 2026 में करीब 200 अरब डॉलर, अल्फाबेट 175 से 185 अरब डॉलर और मेटा 115 से 135 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं। यह दिखाता है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च आने वाले कई सालों तक ऊंचा रह सकता है।

पुराना मॉडल बदला, भारतीय कंपनियों पर असर

पहले ये वैश्विक कंपनियां अपने कई तकनीकी काम भारतीय आईटी कंपनियों को आउटसोर्स करती थीं। अब वे खुद अपने डेटा सेंटर, AI प्लेटफॉर्म और ऑटोमेशन सिस्टम तैयार कर रही हैं। इस बदलाव का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर दिख रहा है। आईटी सेवाओं की मांग में सुस्ती है, प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है और आउटसोर्सिंग की तीव्रता घट रही है। बढ़ते निवेश के कारण लागत दबाव भी बढ़ा है, जिससे सेवाओं की कीमतों और कर्मचारियों की संख्या पर असर पड़ सकता है।

AI से लंबी अवधि का खतरा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में एप्लिकेशन डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे पारंपरिक आईटी काम AI के कारण प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल स्थिति स्थिर है, लेकिन लंबे समय में बिजनेस मॉडल में बदलाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मजबूत ऑर्डर बुक से मिल रहा सहारा

हालांकि तस्वीर पूरी तरह निगेटिव नहीं है। क्लाउड कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। गूगल क्लाउड का बैकलॉग 55% बढ़कर 240 अरब डॉलर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि AI की मांग केवल मौजूदा उछाल नहीं, बल्कि लंबी अवधि का रुझान है।

शेयरों पर ब्रोकरेज की नई राय

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने इन हालात को देखते हुए भारतीय आईटी कंपनियों के वैल्यूएशन में 5% से 10% तक कटौती की है और ग्रोथ अनुमान थोड़ा घटाया है। ब्रोकरेज ने इंफोसिस, टेक महिंद्रा और विप्रो पर ‘होल्ड’ की सलाह बरकरार रखी है, जबकि टीसीएस और एचसीएल टेक की रेटिंग ‘बाय’ से घटाकर ‘होल्ड’ कर दी है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : February 26, 2026 | 12:45 PM IST