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IRFC OFS: 104 रुपये का फ्लोर प्राइस, 5% डिस्काउंट भी क्यों नहीं लुभा पाया निवेशकों को?

104 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हिस्सेदारी बिक्री को कमजोर सब्सक्रिप्शन, विशेषज्ञ बोले- 5% डिस्काउंट आकर्षक नहीं

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अभिनव रंजन   
Last Updated- February 26, 2026 | 2:43 PM IST

IRFC OFS: पब्लिक सेक्टर कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) का ऑफर फॉर सेल (OFS) अब रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है, लेकिन शुरुआत उत्साहजनक नहीं रही। बुधवार को संस्थागत निवेशकों के लिए खुले इस इश्यू को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला। कुल 52.27 करोड़ शेयरों की पेशकश के मुकाबले केवल 22.3 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां आईं। यहां तक कि 26.1 करोड़ शेयरों के मूल इश्यू साइज का भी सिर्फ 85% सब्सक्रिप्शन हो सका।

सरकार ने ग्रीन शू विकल्प नहीं अपनाया

सरकार ने पहले IRFC में 4% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी और 104 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया था। कंपनी ने बताया था कि 2% हिस्सेदारी के बराबर 26.13 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे, साथ में उतने ही शेयरों का ग्रीन शू विकल्प रहेगा। लेकिन देर रात सरकार ने साफ कर दिया कि वह ग्रीन शू विकल्प का इस्तेमाल नहीं करेगी। माना जा रहा है कि कमजोर मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया।

5% का डिस्काउंट भी नहीं लुभा पाया IRFC OFS

एक्सिस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड राजेश पलविया के मुताबिक OFS को मिली कमजोर प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे की कमी दिखाती है। उनका कहना है कि सरकार यह हिस्सेदारी केवल नियामकीय नियमों को पूरा करने के लिए बेच रही है, न कि कारोबार विस्तार के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 5% का डिस्काउंट मौजूदा बाजार की अस्थिरता में खास आकर्षक नहीं है। गुरुवार को सुबह करीब 11 बजे IRFC का शेयर एनएसई पर 104.5 रुपये के आसपास सपाट कारोबार करता दिखा, जबकि पिछले सत्र में यह 4.4% गिरकर 104.56 रुपये पर बंद हुआ था।

रेलवे सेक्टर में सुस्ती का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से रेलवे सेक्टर कमजोर प्रदर्शन कर रहा है और IRFC का शेयर भी गिरावट के रुझान में है। ऐसे में छोटी अवधि के निवेशकों के लिए इसमें खास फायदा नजर नहीं आता। विश्लेषकों का मानना है कि केवल लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशक ही इसमें भागीदारी पर विचार करें।

IRFC OFS: ‘संस्थागत निवेशकों की पसंद नहीं’

बाजार विशेषज्ञ अंबरीश बलिगा का कहना है कि IRFC कभी भी संस्थागत निवेशकों की पसंदीदा कंपनी नहीं रही। कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 86.36% है और फ्री फ्लोट केवल करीब 13.6% है। उनके मुताबिक कंपनी का प्रदर्शन स्थिर रह सकता है, लेकिन तेज ग्रोथ की संभावना कम है। SAMCO सिक्योरिटीज के राज गाइकर का कहना है कि मौजूदा OFS ज्यादा लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए किया गया कदम लगता है, न कि कम कीमत पर बड़ा निवेश अवसर।

रिकॉर्ड ऊंचाई से 50% से ज्यादा फिसला IRFC शेयर

IRFC ने जनवरी 2021 में 26 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बाजार में कदम रखा था। लगभग दो साल तक सीमित दायरे में रहने के बाद शेयर ने जोरदार तेजी दिखाई और 15 जुलाई 2024 को 229 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। लेकिन उस ऊंचाई से अब शेयर 50% से ज्यादा टूट चुका है। पिछले एक साल में यह 15% और दो साल में 31% गिरा है।

नवरत्न कंपनी, लेकिन फिलहाल दबाव में

IRFC भारतीय रेल की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने वाली प्रमुख कंपनी है और इसे नवरत्न का दर्जा हासिल है। यह रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है। हालांकि मजबूत पहचान और सरकारी समर्थन के बावजूद, मौजूदा बाजार हालात में कंपनी का OFS निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण नहीं बन पाया है।

First Published : February 26, 2026 | 1:56 PM IST