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टैरिफ वॉर बना सकता है भारत को नया पावरहाउस! आनंद महिंद्रा ने बताए गेमचेंजर आइडिया

आनंद महिंद्रा ने टैरिफ संकट को '1991 जैसा मौका' बताया और भारत को विदेशी मुद्रा, पर्यटन और मैन्युफैक्चरिंग में बड़े सुधारों की सलाह दी।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- August 07, 2025 | 4:30 PM IST

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने दुनियाभर में चल रही टैरिफ जंग को भारत के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखा है। उन्होंने इसे 1991 की तरह एक नए आर्थिक सुधार युग की शुरुआत का अवसर बताया है। महिंद्रा का मानना है कि इस समय दुनिया भर में जो “मंथन” हो रहा है, वह भारत के लिए “अमृत” बन सकता है।

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका की टैरिफ वॉर (शुल्क युद्ध) के कारण दुनिया की प्राथमिकताएं धीरे-धीरे बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी इसका असर टकराव की तरह दिख रहा है, लेकिन लंबे समय में इसके अच्छे नतीजे भी सामने आ सकते हैं। आनंद महिंद्रा के मुताबिक, जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देश अब अपनी सुरक्षा पर ज़्यादा खर्च कर रहे हैं और इस पर फिर से सोच रहे हैं कि उन्हें किस पर निर्भर रहना चाहिए। इस बदलाव से यूरोप में नई आर्थिक ऊर्जा आ सकती है, जो आने वाले समय में दुनिया के विकास का नया रास्ता बन सकती है।

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कनाडा में आंतरिक व्यापार रुकावटें तोड़ने की कोशिश

आनंद महिंद्रा ने अपनी पोस्ट में कहा कि कनाडा में भी लंबे समय से अलग-अलग राज्यों (प्रांतों) के बीच व्यापार में रुकावटें थीं। लेकिन अब दुनिया में बढ़ते दबाव की वजह से कनाडा भी इन समस्याओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। इससे कनाडा एक कॉमन मार्केट यानी साझा बाज़ार की तरफ बढ़ सकता है। भारत को लेकर महिंद्रा ने कहा कि हमें भी इस ग्लोबल संकट को एक मौके की तरह देखना चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि अब ‘Ease of Doing Business’ यानी व्यापार करना आसान बनाने की कोशिशों को अगले स्तर तक ले जाने की ज़रूरत है।

उन्होंने निवेशकों के लिए एक तेज़, आसान और प्रभावशाली सिंगल विंडो सिस्टम बनाने की मांग की। चूंकि भारत में कई नियम राज्य सरकारों के हाथ में होते हैं, इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे इच्छुक राज्यों को मिलाकर एक खास प्लेटफॉर्म बनाया जा सकता है, जो पारदर्शी हो, तेज़ हो और भरोसेमंद हो। इससे दुनियाभर के निवेशक भारत की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।

टूरिज़्म में छिपा है विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत

महिंद्रा ने भारत के टूरिज्म सेक्टर को देश की एक ऐसी संपत्ति बताया है, जिसका अभी तक पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में बहुत ज़्यादा संभावनाएं हैं, और अगर इस पर ध्यान दिया जाए तो यह भारत की अर्थव्यवस्था को काफी मज़बूती दे सकता है। महिंद्रा का मानना है कि अगर वीज़ा की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएं और देश में टूरिज्म कॉरिडोर (यात्रा मार्ग) तैयार किए जाएं, तो इससे न सिर्फ़ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

इसके साथ ही आनंद महिंद्रा ने कुछ और ज़रूरी सुधारों की भी बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे और मझोले व्यवसायों (MSMEs) को ज्यादा लिक्विडिटी यानी पूंजी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे आसानी से अपना काम चला सकें। साथ ही, उन्होंने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर यानी सड़क, रेल, बिजली जैसी सुविधाओं में तेज़ी से निवेश करने की वकालत की। महिंद्रा ने PLI स्कीम्स को और बढ़ाने का सुझाव भी दिया, ताकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मज़बूती मिले। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी सामान पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाया जाए ताकि देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन मिल सके।

अपनी बात खत्म करते हुए आनंद महिंद्रा ने कहा कि कई बार जो फैसले या नतीजे हमें चौंकाने वाले लगते हैं, वही आगे चलकर सबसे बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बर्शर्ते, हम उन्हें समझदारी और सोच-समझकर अपनाएं। उन्होंने भारत से अपील की कि वह इस मौके को पहचाने और इसका पूरा फायदा उठाए, ताकि देश एक मजबूत, आत्मनिर्भर और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सके।

First Published : August 7, 2025 | 4:13 PM IST