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बेरोजगारी पर वार: शिक्षा-रोजगार की खाई पाटने के लिए नीति आयोग की अध्यक्षता में बनी EEE समिति

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शिक्षा और रोजगार के अंतर को खत्म करने के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय ईईई समिति बनाई है, जो एआई के दौर में युवाओं को स्किल्ड और आत्मनिर्भर बनाएगी

Last Updated- April 24, 2026 | 10:56 PM IST
Higher Education
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने के उपायों की सिफारिश के लिए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में शिक्षा से रोजगार और उद्यम (ईईई) की उच्च स्तरीय स्थायी समिति का गठन किया है। यह जानकारी बिज़नेस स्टैंडर्ड को आदेश से मिली है।

सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च स्तरीय स्थायी समिति का प्रस्ताव किया था। यह प्रस्ताव वैश्विक सेवाओं में भारत की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए लक्ष्य को हासिल करने के लिए किया गया था। दरअसल, सरकार के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भारत की यह वैश्विक हिस्सेदारी मुख्य प्राथमिकता है। इस सिलसिले में पैनल को वृद्धि, रोजगार व निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने का काम सौंपा गया था। साथ ही पैनल को आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस (एआई)  सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का आकलन करने और उपयुक्त नीतिगत उपायों की सिफारिश करने का काम भी सौंपा गया था।

सरकारी आदेश के अनुसार नवगठित समिति में श्रम और रोजगार, कौशल विकास व उद्यमिता, सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन और इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी जैसे केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव शामिल हैं। इसमें वाणिज्य, आर्थिक मामले, उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा और साक्षरता सहित प्रमुख विभागों के सचिवों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सरकारों के मुख्य सचिव भी हैं।

इस समिति में औद्योगिक निकायों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस क्रम में नैशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम), भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), भारतीय सूक्ष्म व लघु और मध्यम उद्यम परिसंघ (एफआईएसएमई), सेवा निर्यात संवर्द्धन परिषद (एसईपीसी) और तिरुपुर निर्यातक संघ आदि शामिल हैं।  

शिक्षा क्षेत्र से इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) और और शिव नादर यूनिवर्सिटी के संकाय को शामिल किया गया है। नीति आयोग का सेवा प्रभाग समिति के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करेगा। ऑर्डर के अनुसार समिति शिक्षा (स्कूल, उच्च व कौशल) और रोजगार या उद्यम के बीच की कमियों की पहचान करेगी और उनके बीच सुचारु परिवर्तन की सुविधा के लिए तरीके सुझाएगी। यह विकास, रोजगार और निर्यात के लिए उच्च-संभावित सेवा उप-क्षेत्रों का मानचित्रण करेगी, क्षेत्र-विशिष्ट बाधाओं को उजागर करेगी और नीति व नियामक सुधारों का सुझाव देगी।

यह कदम शिक्षा-रोजगार के बढ़ते अंतर की चिंताओं के बीच आया है। दरअसल स्नातकों में बेरोजगारी बढ़ रही है जबकि उद्योग लगातार कौशल की कमी की शिकायत कर रहा है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की मार्च को जारी ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026’ रिपोर्ट के अनुसार वर्ष  2023 में 20-29 वर्ष आयु वर्ग के दो-तिहाई से अधिक बेरोजगार भारतीय स्नातक थे। इनमें स्नातक बेरोजगारों का हिस्सा 2017 के 46 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 67 प्रतिशत हो गया।

यह समिति उभरते सेवा निर्यात क्षेत्रों की भी जांच करेगी, वैश्विक बाजारों और कौशल तक पहुंच में सुधार के लिए कदम सुझाएगी, कुशल प्रवासियों और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के तरीकों का सुझाव देगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनियां तेजी से ऑटोमेशन और आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही हैं। इससे कुछ भूमिकाओं में छंटनी हो रही है और विस्थापन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं जबकि नए तकनीकी रूप से संरेखित कौशल की मांग बढ़ रही है।

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First Published - April 24, 2026 | 10:17 PM IST

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