facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिकी कोर्ट ने एंट्रिक्स के खिलाफ देवास का फैसला रखा बरकरार, 56.25 करोड़ डॉलर का अवॉर्ड कायमएअर इंडिया A320 का हाइड्रोलिक सिस्टम हुआ था फेल, 4 सेकंड तक नियंत्रण से बाहर रहा विमान: एयरबसमहिंद्रा का भारी ट्रकों पर बड़ा दांव, बाजार हिस्सेदारी 5% करनी की तैयारी; नई डीलरशिप जोड़ेगी कंपनीAMCA लड़ाकू विमान के लिए रिलायंस और रोल्स-रॉयस ने मिलाया हाथ, भारत में बनेगा फाइटर जेट इंजनवैश्विक पटल पर चमका भारत, प्यू रिसर्च के सर्वे में दुनिया के कई देशों ने जताई सकारात्मक रायस्वतंत्रता दिवस पर घूमने का बढ़ा क्रेज, होटल बुकिंग 20% तक बढ़ी; युवाओं में ट्रैवल का जोशलंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ी, ब्याज दर स्थिर रहने की उम्मीद से मिला सहारावीकेंड पर भारी डिस्काउंट व ग्राहकों के बेहतर मूड से अच्छी खरीदारी की उम्मीद, रिटेलरों को मजबूत बिक्री का भरोसाबैंक जमा वृद्धि दिसंबर 2016 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर, 31 जुलाई तक 15.4% बढ़ीअमेरिका की नई रिपोर्ट से भारत पर बढ़ा दबाव, चीन के ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क में किया गया शामिल

महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने की तैयारी, CWC की मंजूरी के बाद जल्द शुरू होंगी नदी जोड़ परियोजनाएं

Advertisement

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कुछ परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि कुछ परियोजनाएं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के चरण में हैं

Last Updated- August 14, 2026 | 8:08 PM IST
river linking
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने के लिए नदी जोड़ परियोजनाएं लागू करने की घोषणा की गई है। नदी जोड़ परियोजनाओं को केंद्रीय जल आयोग (CWC) की मंजूरी मिलने के बाद इसी वर्ष या अगले वर्ष की शुरुआत में इन परियोजनाओं का काम शुरू किया जाएगा। इस संबंध में महाराष्ट्र जलसंपत्ति नियमन प्राधिकरण और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) भी किया गया है।

पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों का समुद्र में बहकर जाने वाला पानी विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से गोदावरी घाटी में लाने से उत्तर महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के जल की कमी वाले क्षेत्रों में संतुलन स्थापित किया जा सकता है। इन क्षेत्रों को सूखा मुक्त बनाने का सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कुछ परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि कुछ परियोजनाएं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के चरण में हैं। इस दिशा में काम करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है। जिन नदी घाटियों में पानी की उपलब्धता अधिक है, वहां से जल की कमी वाली घाटियों तक पानी पहुंचाने के लिए नदी जोड़ परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं।

देश का पहला जलसंपत्ति नियमन प्राधिकरण महाराष्ट्र में

देश का पहला जलसंपत्ति नियमन प्राधिकरण महाराष्ट्र में स्थापित किया गया। सबसे अधिक विस्तार वाली गोदावरी घाटी का जल आराखड़ा सबसे पहले तैयार किया गया। इसके बाद कृष्णा, तापी, नर्मदा, पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों और महानदी क्षेत्रों के आराखड़े तैयार किए गए।

इन छह आराखड़ों को एकीकृत कर अक्टूबर 2018 में महाराष्ट्र का एकीकृत जल आराखड़ा तैयार किया गया। ऐसा आराखड़ा तैयार करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बना। वर्ष 2024 में इस एकीकृत जल आराखड़े में आवश्यक बदलाव कर नदी जोड़ परियोजनाओं को भी इसमें शामिल किया गया।

सुधार और नीतियों पर जोर

जल का अधिक प्रभावी उपयोग करने के लिए वर्ष 2017 में खुली नहर प्रणाली को बंद कर पाइप आधारित वितरण नेटवर्क (PDN) प्रणाली की ओर बढ़ने का निर्णय लिया गया। इस प्रणाली के कारण बचाए गए पानी को माण-खटाव जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाना संभव हुआ।

एमएमआर और पीएमआर के लिए अगले 30 से 40 वर्षों को ध्यान में रखते हुए एकीकृत जल आराखड़ा तैयार किया जाएगा। इसमें पेयजल, कृषि और उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

Also Read: महाराष्ट्र में पांच वर्षों में बंद हुई 36,211 कंपनियां, CM फडणवीस ने कहा: इनमें 76% तो कभी चालू ही नहीं हुई थीं

डेटा सेंटरों को शोधित पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। महानगरपालिकाओं के सीवेज पर टर्शियरी ट्रीटमेंट कर इसे डेटा सेंटरों के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए निजी निवेश आकर्षित कर पानी की चक्रीय अर्थव्यवस्था विकसित करने पर विचार करना होगा।

जल आराखड़ा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और महाराष्ट्र जलसंपत्ति नियमन प्राधिकरण के बीच “जल शुल्क के प्रभाव का मूल्यांकन, परियोजना की वर्तमान स्थिति और उपाययोजनाएं” विषय पर समझौता ज्ञापन किया गया।

मझगांव डॉक के निदेशक कैप्टन वासुदेव पुराणिक और MWRRA की अध्यक्ष श्वेताली ठाकरे ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि जल नियमन प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी, लेकिन वास्तव में वर्ष 2015 से इसका काम शुरू हुआ और एकीकृत जल आराखड़ा तैयार करने की दिशा में कदम उठाया गया।

सबसे पहले गोदावरी नदी घाटी का आराखड़ा तैयार किया गया। महाराष्ट्र की लगभग 50 प्रतिशत नदियां और उनकी सहायक नदियां गोदावरी घाटी में आती हैं। वर्ष 2018 में जल आराखड़ा तैयार करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बना।

प्यास बुझाने के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं

महाराष्ट्र में कई नदी जोड़ परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लागत अलग-अलग है। अकेले सबसे बड़ी वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना (विदर्भ क्षेत्र के लिए) की अनुमानित लागत लगभग 87,342 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 94,968 करोड़ रुपये हो गई है।

उत्तरी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के लिए लगभग 13,497 करोड़ रुपये की दमनगंगा-वैतरणा-गोदावरी परियोजना और नासिक तथा जलगांव जिलों के लिए लगभग 7,465 करोड़ रुपये की नार-पार-गिरना परियोजना जैसी अन्य हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।

Advertisement
First Published - August 14, 2026 | 8:08 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement