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देश में कपास की बंपर सप्लाई से घट सकते हैं कच्चे माल के दाम, कपड़ा उद्योग को मिलेगी राहत

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कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के मुताबिक, कुल कपास सप्लाई का अनुमान 456.59 लाख गांठ है, जबकि घरेलू खपत 348 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलो) रहने का अनुमान है

Last Updated- August 14, 2026 | 8:22 PM IST
Cotton farm
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बढ़ती उत्पादन लागत से परेशान कपड़ा उद्योग के लिए एक अच्छी खबर है। देश में कपास की कोई कमी होने वाली नहीं है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के मुताबिक, कपास की प्रेसिंग, उत्पादन और आयात बढ़ने का अनुमान है। इसके चलते देश में मांग की तुलना में कपास का स्टॉक अधिक हो गया है और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ये आंकड़े कपास की कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय गिरावट के संकेत दे रहे हैं।

सस्ता कपास कपड़ा उद्योग के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। पिछले कुछ महीनों में कपास की कीमतों में तेजी से टेक्सटाइल कंपनियों की लागत बढ़ गई है। कम उत्पादन के कारण स्टॉक में कमी होने की आशंका के चलते कपास के दाम बढ़ रहे थे। इससे टेक्सटाइल कंपनियों की चिंता लगातार बढ़ रही थी। हालांकि, CAI की नई रिपोर्ट उन्हें राहत देने वाली साबित हो सकती है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के मुताबिक, कुल कपास सप्लाई का अनुमान 456.59 लाख गांठ है, जबकि घरेलू खपत 348 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलो) रहने का अनुमान है। क्लोजिंग स्टॉक का अनुमान 93.59 लाख गांठ है, जो पिछले सीजन से 38 लाख गांठ अधिक है।

कीमतों में गिरावट के संकेत

ज्यादा सप्लाई और इन्वेंट्री के कारण कपास की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। CAI ने 2025-26 के लिए कपास प्रेसिंग का अनुमान 2 लाख गांठ बढ़ाकर 339 लाख गांठ कर दिया है। यह बढ़ोतरी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए प्रेसिंग के बढ़े हुए अनुमानों को दर्शाती है। इसकी कुछ भरपाई ऊपरी राजस्थान में कम प्रेसिंग से हुई है।

संशोधित अनुमान 355.74 लाख रनिंग गांठ (एक गांठ 162 किलो) के बराबर है। केडिया एडवाइजरी फर्म का मानना है कि ज्यादा प्रेसिंग और आयात के साथ बढ़ते क्लोजिंग स्टॉक से कपास की अच्छी उपलब्धता और निकट भविष्य में कीमतों में गिरावट के संकेत मिलते हैं।

निर्यात कम, आयात ज्यादा होने का अनुमान

ज्यादा प्रेसिंग का अनुमान पहले से ही अच्छी घरेलू उपलब्धता में और इजाफा कर रहा है। CAI ने मौजूदा सीजन के लिए कपास आयात का अनुमान भी 2 लाख गांठ बढ़ाकर 62 लाख गांठ कर दिया है, जबकि पिछले साल यह 41 लाख गांठ था।

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31 जुलाई तक भारतीय बंदरगाहों पर करीब 54 लाख गांठ कपास पहुंच चुकी थीं, जो आयात की अच्छी उपलब्धता को दर्शाता है। वहीं, कपास का निर्यात 15 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 18 लाख गांठ से कम है। जुलाई तक 12.25 लाख गांठ कपास का निर्यात किया जा चुका था।

कपास की घरेलू मांग में इजाफा

घरेलू बाजार में कपास की मांग स्थिर रहने का अनुमान है। CAI ने 2025-26 के लिए घरेलू कपास खपत का अनुमान 348 लाख गांठ पर बरकरार रखा है, जो पिछले साल के 319 लाख गांठ से काफी ज्यादा है। 31 जुलाई तक खपत का अनुमान 290 लाख गांठ था।

खपत बढ़ने के बावजूद सप्लाई में बढ़ोतरी काफी ज्यादा है। ऐसे में अतिरिक्त उपलब्धता के कारण कपास की कीमतों पर दबाव बना रहने की संभावना है।

जरूरत से ज्यादा स्टॉक

2025-26 के लिए कुल कपास सप्लाई का अनुमान 456.59 लाख गांठ है। इसमें 55.59 लाख गांठ का शुरुआती स्टॉक, 339 लाख गांठ की प्रेसिंग और 62 लाख गांठ का आयात शामिल है।

उपलब्ध सरप्लस (अतिरिक्त स्टॉक) का अनुमान 108.59 लाख गांठ है, जबकि पिछले साल यह 73.59 लाख गांठ था। क्लोजिंग स्टॉक (साल के अंत का स्टॉक) 93.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो साल-दर-साल 38 लाख गांठ अधिक है।

इन्वेंट्री का यह ऊंचा स्तर कपास की कीमतों पर दबाव डाल सकता है, जब तक कि मांग में काफी सुधार नहीं होता।

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First Published - August 14, 2026 | 8:18 PM IST

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