facebookmetapixel
Advertisement
N Chandrasekaran Resigns: टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारीSEBI के नए प्रस्ताव से बढ़ेगी मान्यता प्राप्त निवेशकों की संख्या, पात्रता के नियम होंगे आसानSIF की रफ्तार तेज: जुलाई में AUM 30% बढ़कर ₹23,177 करोड़, फोलियो 1 लाख के करीबQ1 में टाटा मोटर्स पीवी का मुनाफा 80% घटा, JLR ने बिगाड़ा परफॉर्मेंस! शुक्रवार को स्टॉक पर रहेगी नजरAyushman Card: न अस्पताल के चक्कर, न लंबी लाइन! व्हाट्सऐप से ऐसे बनाएं कार्ड, जानें आवेदन का आसान तरीकाREITs vs FDs vs equities: टैक्स कटने के बाद किस निवेश में ज्यादा रिटर्न बचेगा?Trade Deficit: जुलाई में भारत का व्यापार घाटा 6 महीने के हाई पर, 31.98 अरब डॉलर पहुंचाआधार कार्ड से घर बैठे मिनटों में बनाएं अपना ई-पैन: जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा ऑनलाइन प्रोसेससाइबर सुरक्षा पर साथ आए भारत-इजरायल, AI और रैंसमवेयर हमलों से निपटने के लिए बढ़ाएंगे सहयोगएयर इंडिया की सख्ती, हर पायलट को एक बार देना होगा साइकोएक्टिव पदार्थों का टेस्ट

चालबाज चीन की भारतीय चावल के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश, 520 टन की खेप भी खारिज

Advertisement

चीन की अपनी एजेंसी भारत से रवाना होने से पहले खेपों की जांच और मंजूरी देती है, ऐसे में चीन पहुंचने के बाद उसी खेप में जीएमओ मिलने का दावा कई सवाल खड़े करते हैं

Last Updated- August 13, 2026 | 8:35 PM IST
rice export
प्रतीकात्मक तस्वीर

Indian rice exports: चीन ने एक बार फिर चालबाजी दिखाते हुए भारतीय चावल निर्यातकों के रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया है। इससे भारत और चीन के बीच चावल का पूरा व्यापार रुक गया है। चीन ने भारतीय चावल की कई खेपों को जीएमओ की मौजूदगी का आरोप लगाकर खारिज कर दिया है। जबकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती है। इसे भारतीय चावल के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश मानी जा रही है क्योंकि चीन ने अपनी जरुरत का चावल निर्यात करने के बाद यह कदम उठाया है।

भारत में नहीं होती जीएम चावल की खेती

चीन ने कथित तौर पर भारतीय चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (जीएमओ) पाए जाने की बात कहते हुए 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया । यह कार्रवाई चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (GACC) ने की है। इससे पहले इसी साल तीन भारतीय निर्यातकों को निलंबित किया गया था, जबकि अब उनका पंजीकरण भी रद्द कर दिया गया है। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, वे छत्तीसगढ़, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। भारतीय अधिकारियों, कारोबारियों और निर्यातकों ने चीन के इस कदम पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि भारत में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती है।

520 टन चावल की खेप भी हुई खारिज

चीन की ओर से भारतीय गैर-बासमती चावल की करीब 70 खेपों को मई के अंत तक जीएमओ की मौजूदगी का आरोप लगाकर खारिज किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ के राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, विशाखापत्तनम बंदरगाह से चीन के शेकोउ बंदरगाह भेजी गई 520 टन स्वर्णा सफेद चावल की 100 प्रतिशत टूटी हुई खेप को हाल ही में जीएमओ की मौजूदगी के आरोप में खारिज कर दिया गया। इस खेप की भारत में रवाना होने से पहले जांच की गई थी। एसोसिएशन ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अध्यक्ष अभिषेक देव को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

Also Read: Ayushman Card: न अस्पताल के चक्कर, न लंबी लाइन! व्हाट्सऐप से ऐसे बनाएं कार्ड, जानें आवेदन का आसान तरीका

भारत के खिलाफ व्यापारिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश

एपीडा के अधिकारियों का कहना है कि चीन की अपनी एजेंसी भारत से रवाना होने से पहले खेपों की जांच और मंजूरी देती है, ऐसे में चीन पहुंचने के बाद उसी खेप में जीएमओ मिलने का दावा कई सवाल खड़े करता हैं। चीन की ओर से भारतीय चावल की खेपों को खारिज करने के लिए इस्तेमाल की जा रही जांच पद्धति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस घटनाक्रम से भारतीय चावल उद्योग में चिंता बढ़ी है कि चीन की ओर से बनाया जा रहा जीएमओ संबंधी नैरेटिव आगे चलकर पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय संघ, में भारतीय बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात को प्रभावित कर सकता है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के वाइस-प्रेसिडेंट देव गर्ग ने कहा कि यह स्थिति भारत के चावल एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

चीन की चालकी

वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को कुल 3,24,892 टन चावल का निर्यात किया गया था। जिसका मूल्य 113 मिलियन डॉलर था जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान चीन को 102 मिलियन डॉलर मूल्य का 346418 टन चावल निर्यात किया गया जिसमें 3,42,503 टन गैर बासमती और 3915 टन बासमती चावल था। गैर बासमती चावल का मूल्य 98.1 मिलियन डॉलर और बासमती का मूल्य 3.8 मूल्य था। आंकड़ों से साफ जाहिर है कि चीनी ने पिछले साल जितना चावल भारत से खरीदा था उससे ज्यादा इस साल की पहली तिमाही में ही ले लिया है वह भी पिछले साल से कम मूल्य पर यह खरीद की गई है। कारोबारियों का कहना है कि चीन में मांग पूरी हो जाने के बाद वहां से भारतीय चावल की खेपों को लेकर सख्ती बढ़ी है।

चावल की निर्यात मांग तेज

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने बासमती और गैर-बासमती सहित कुल 21.56 मिलियन टन चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 11.53 अरब डॉलर रही। इसी अवधि में वैश्विक चावल कारोबार का अनुमान करीब 59.8 मिलियन टन था। जबकि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल और जून के दौरान भारत ने 5.9 मिलियन टन से अधिक चावल का निर्यात किया, जिसका मूल्य करीब 3.34 अरब डॉलर रहा।

Also Read: Trade Deficit: जुलाई में भारत का व्यापार घाटा 6 महीने के हाई पर, 31.98 अरब डॉलर पहुंचा

बासमती के एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड उछाल

भारत का बासमती चावल निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एपिडा के अनुसार, भारत ने 2025-26 में 65.2 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया। इसकी कीमत 50,138 करोड़ रुपये थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 144.3 करोड़ रुपये का 15 लाख टन बासमती का निर्यात किया जा चुका है।

भारत में चावल उत्पादन बढ़ने का अनुमान

अल नीनो की स्थितियों के बावजूद भारत का चावल उत्पादन लगभग 15.1 करोड़ टन से बढ़कर 15.3 करोड़ टन होने की उम्मीद है। इससे लगभग 20 लाख टन का अतिरिक्त सरप्लस बनेगा। वहीं, स्टॉक बफर जरूरतों से लगभग 2.7 करोड़ टन अधिक होने का अनुमान है। जबकि वैश्विक चावल उत्पादन में लगभग 90 लाख टन की गिरावट का अनुमान है।

Advertisement
First Published - August 13, 2026 | 8:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement