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एयर इंडिया की सख्ती, हर पायलट को एक बार देना होगा साइकोएक्टिव पदार्थों का टेस्ट

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पिछले साल जून में एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद से एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है

Last Updated- August 13, 2026 | 4:20 PM IST
Air India
प्रतीकात्मक तस्वीर

एयर इंडिया ने गुरुवार से सभी पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस (नशीले पदार्थों) की टेस्टिंग को जरूरी बना दिया है। अब हर एक पायलट को एक बार इस टेस्ट से गुजरना होगा। यह कदम 4 अगस्त की फुकेट-दिल्ली उड़ान के दौरान पायलट-इन-कमांड के मारिजुआना टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने के तहत उठाया गया है। एयरलाइन पहले से ही डीजीसीए के नियमों के तहत पायलटों और अन्य विमानन कर्मचारियों की रैंडम जांच करती रही है, जो आगे भी जारी रहेगी।

सभी पायलटों की अनिवार्य स्क्रीनिंग शुरू

एयरलाइन पहले से ही डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की गाइडलाइंस के तहत पायलटों और अन्य विमानन कर्मचारियों की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए रैंडम टेस्टिंग करती रही है। यह रैंडम टेस्टिंग आगे भी नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

एयर इंडिया ने गुरुवार को पायलटों को भेजे एक ईमेल में कहा कि दशकों से एयर इंडिया भारतीय विमानन की ध्वजवाहक रही है और यात्रियों का भरोसा उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है। एयरलाइन ने कहा कि इस भरोसे को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

एयरलाइन ने कहा कि अब वह इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए सभी ग्रुप पायलटों की पूरी स्क्रीनिंग कराएगी। इसमें उन पदार्थों और दवाओं की जांच होगी, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है। यह जांच अनिवार्य है और 13 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है। एयर इंडिया ने बताया कि यह टेस्टिंग गुरुग्राम अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान, उड़ान के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर या एयर इंडिया के कार्यालयों में, या संबंधित बेस द्वारा उपलब्ध कराई गई जगहों पर की जाएगी।

आगे एयरलाइन ने कहा कि यह पहल मौजूदा नियामकीय जरूरतों से आगे बढ़कर की जा रही है। इसका उद्देश्य सुरक्षा और पेशेवर मानकों को मजबूत करना और यात्रियों, हितधारकों तथा आम लोगों का भरोसा बनाए रखना है।

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फुकेट-दिल्ली उड़ान में क्या हुआ?

एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 ने 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया। इस घटना में 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों समेत कुल 24 लोग घायल हुए। एयरबस A320 में 137 यात्री, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे, और आठ क्रू सदस्य सवार थे। विमान ने बाद में दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की।

घटना के बाद दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया और उनका अनिवार्य पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट किया गया। विमान के पायलट-इन-कमांड की शुरुआती जांच में मारिजुआना का नतीजा ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था। बाद की कन्फर्मेटरी जांच में भी टेस्ट पॉजिटिव पाया गया।

मामले की जांच जारी

इस घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। इसे ‘सीरियस इंसिडेंट’ के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। एयरबस और फ्रांस की ब्यूरो ऑफ इन्क्वायरी एंड एनालिसिस फॉर सिविल एविएशन सेफ्टी (BEA) भी जांच में मदद कर रहे हैं।

AAIB ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी या अपुष्ट जानकारी के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। जांच के दौरान जुटाए गए रिकॉर्ड, बयान, मेडिकल जानकारी और अन्य सामग्री गोपनीय रखी जाती है।

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पहली बार पॉजिटिव होने पर लाइसेंस रद्द नहीं होता

डीजीसीए के नियमों सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) गवर्निंग टेस्टिंग के अनुसार ड्यूटी पर मौजूद विमान कर्मचारियों को रैंडम तरीके से साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच के लिए चुना जाता है। अगर पहली बार टेस्ट पॉजिटिव आता है तो पायलट का लाइसेंस तुरंत रद्द या निलंबित नहीं होता। ऐसे पायलट को नशामुक्ति या पुनर्वास कार्यक्रम में भेजा जाता है। कार्यक्रम पूरा करने, दोबारा यूरिन टेस्ट पास करने और मेडिकल फिटनेस क्लियरेंस मिलने के बाद ही वह दोबारा उड़ान भर सकता है। दूसरी बार टेस्ट पॉजिटिव आने पर पायलट का लाइसेंस तीन साल तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द भी हो सकता है।

एयर इंडिया के आंतरिक नियम डीजीसीए के न्यूनतम नियमों से ज्यादा सख्त बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कंपनी अपनी आंतरिक जांच के आधार पर फुकेट-दिल्ली उड़ान के पायलट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। इस मामले में घटना की गंभीरता और यात्रियों तथा क्रू सदस्यों के घायल होने को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

एयर इंडिया की सुरक्षा पर बढ़ी नजर

पिछले साल जून में एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद से एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। फुकेट-दिल्ली की घटना ने यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइन पर भरोसे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

एयर इंडिया के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन को मंगलवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तलब किया था। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। उन्होंने मंत्रालय और डीजीसीए के अधिकारियों से भी मुलाकात की। अधिकारियों ने उन्हें एयर इंडिया के अलग-अलग विभागों को इस मामले में जरूरी कदम उठाने और सुरक्षा पर ध्यान देने के निर्देश देने को कहा।

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First Published - August 13, 2026 | 4:20 PM IST

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