केंद्रीय बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने विकसित देशों से कहा है कि वे सभी देशों को कुल मिलाकर शून्य (नेट जीरो) कार्बन उत्सर्जन के लिए दबाव न डालें और विकासशील देशों को थोड़ी राहत दें। वह इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी की ओर से बुधवार को आयोजित नेट जीरो पर आयोजित अंतर मंत्रालयी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
सिंह की यह प्रतिक्रिया जलवायु सम्मेलन या सीओपी 26 के पहले आई है, जो इस साल नवंबर में ब्रिटेन के ग्लासगो में होने वाली है। उम्मीद की जा रही है कि सीओपी26 के दौरान प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं अपने कुल मिलाकर शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य की घोषणा करेंगी। कुल मिलाकर शून्य का मतलब कार्बन उत्सर्जन और उत्सर्जन बचाने के संतुलन से है। शुद्ध ऋणात्मक उत्सर्जन का मतलब बचत, उत्सर्जन की तुलना में ज्यादा है। चीन ने घोषणा की है कि वह 2060 तक कुल मिलाकर शून्य का लक्ष्य हासिल कर लेगा, वहीं यूके ने 2050 तक का लक्ष्य रखा है। इसने कुल मिलाकर शून्य उत्सर्जन का कानून भी पारित किया है।
भारत ने कुल मिलाकर शून्य उत्सर्जन को लेकर अब तक कोई ऐसा लक्ष्य नहीं रखा है।
सिंह ने कहा, ‘विकसित देशों ने पहले की कार्बन के मालमे में 80 प्रतिशत जगह घेर रखी है। अब आपको अन्य देशों को जगह देनी पड़ेगी, उदाहरण के लिए अफ्रीका में अभी भी 80 करोड़ लोगों को बिजली नहीं मिलती। यह भारत का ही मामला नहीं है कि हमने निवेश किया है। यह उन देशों का मामला है। आप उनसे शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लिए नहीं कह सकते। इन देशों को विकसित होना है और उस विकास के लिए स्टील सीमेंट आदि की जरूरत है। आप उन्हें नहीं रोक सकते।’