इस वर्ष के अंत तक देश में कोविड-19 टीकों की आपूर्ति तेजी से बढऩे की उम्मीद है क्योंकि उस समय तक न केवल कई अन्य कंपनियों के टीके उपलब्ध होंगे बल्कि टीका निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल की कमी भी दूर हो जाएगी। इससे यही संकेत निकलता है कि भारत महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में होगा।
भारत में अब तक 3.72 करोड़ लोगों को टीके की दोनों खुराक दी जा चुकी हैं जबकि 13.55 करोड़ लोगों को कम से कम एक टीका लग चुका है। इस बीच देश के कई राज्यों ने टीकों की कम होती तादाद को लेकर चिंता जताई है क्योंकि यह कमी टीकाकरण अभियान को प्रभावित करेगी। उदाहरण के लिए महाराष्टï्र ने तय किया है कि उसके पास जो टीके उपलब्ध हैं उन्हें वह 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को लगाएगा और 18-44 वर्ष की श्रेणी में टीकाकरण फिलहाल बंद रहेगा।
बहरहाल, विश्लेषकों के आंकड़े बताते हैं कि आने वाले महीनों में टीकों की आपूर्ति में सुधार हो सकता है। येस सिक्युरिटीज रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार सितंबर तक घरेलू टीका विनिर्माण क्षमता बढ़कर करीब 20 करोड़ खुराक प्रति माह हो जाएगी। फिलहाल यह 9 करोड़ खुराक प्रति माह है। दिसंबर तक क्षमता में और विस्तार होगा और यह 26.5 करोड़ खुराक प्रति माह हो जाएगी। इस अनुमान में रूसी टीके स्पूतनिक वी और कैडिला हेल्थकेयर के डीएनए-प्लाज्मिड टीके जायकोवी-डी का उत्पादन शाामिल होने की बात शामिल है। येस सिक्युरिटीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि अरविंदो फार्मा जो कई टीकों पर काम कर रही है वह भी दिसंबर तक टीकों का उत्पादन शुरू कर देगी।
इस बीच कोवैक्सीन टीका बनाने वाली भारत बायोटेक भी अपनी क्षमता बढ़ाने में लगी है। गत माह केंद्र सरकार ने कहा था कि वह कोवैक्सीन का उत्पादन मौजूदा एक करोड़ खुराक प्रति माह से 10 गुना बढ़ाने की योजना बना रही है। लक्ष्य यह है कि सितंबर तक उत्पादन को 10 करोड़ खुराक प्रति माह पहुंचा दिया जाए। उस समय तक भारत बायोटेेक के साथ तीन अन्य सरकारी कंपनियां कोवैक्सीन का निर्माण शुरू कर देंगी। कंपनी की योजना अपने सालाना उत्पादन को 70 करोड़ खुराक तक पहुंचाने की है।
दूसरी ओर सीरम इंस्टीट्यूट कच्चे माल के लिए नए माध्यम तलाश कर रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने हाल ही में एक साक्षात्कार में संकेत दिया है कि अगर कच्चा माल आसानी से मिलता है तो कंपनी नोवावैक्स टीके की 50 फीसदी अधिक खुराक तैयार कर सकती है।
सीरम इंस्टीट्यूट नोवावैक्स टीके तैयार कर रहा है जबकि उसे अभी अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की मंजूरी मिलनी बाकी है। कंपनी ने हर महीने नोवावैक्स की 5 करोड़ जबकि कोविशील्ड की 10 करोड़ खुराक तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। इतना ही नहीं जाइडस कैडिला भी सालाना करीब 24 करोड़ खुराक तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वी के पॉल ने गत माह संकेत दिया था कि बायॉलॉजिकल ई का टीका जो तीसरे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण से गुजर रहा है, वह भी अगस्त तक उपलब्ध हो सकता है। इसके अलावा विदेशी टीका निर्माता कंपनियां फाइजर और मॉडर्ना भी अगले कुछ महीनोंं में भारत में टीकों की आपूर्ति शुरू कर सकती हैं।
येस सिक्युरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में बनने वाले टीकों में से 20 फीसदी अगले कुछ महीनों में भारत निर्यात होने लगेंगे। रिपोर्ट में कहा गया कि इस हिसाब से वित्त वर्ष 2022 में टीकों का आयात 15.5 से 17 करोड़ खुराक तक रह सकता है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि दुनिया भर में 5.6 अरब लोगों का टीकाकरण करने की जरूरत होगी क्योंकि 30 फीसदी आबादी 18 वर्ष से कम उम्र की है। अमेरिका में 25 करोड़ और यूरोप में 32 करोड़ लोगों के साथ आबादी का बड़ा हिस्सा अगले कुछ महीनों में टीकाकृत हो चुका होगा। चीन अपनी वयस्क आबादी के टीकाकरण के लिए पूरी तरह अपने देसी टीके पर भरोसा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका मेंं सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के बाद वहां के टीका विनिर्माताओं को दुनिया की 4 अरब आबादी को ध्यान में रखकर टीका उत्पादन करना होगा। चूंकि भारत की एक अरब की वयस्क आबादी अमेरिकी टीकों के 4 अरब के इस संभावित बाजार का चौथाई हिस्सा है इसलिए भारत को अमेरिकी टीका निर्यात का 20 से 25 फीसदी हिस्सा मिल सकता है।