इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा टीके ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोविड-19 के नए रूप से बचाव नहीं कर पाएंगे। कोविड के इस नए रूप में इतने बदलाव नहीं आए हैं कि टीका ही निष्प्रभावी हो जाए। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने मंगलवार को संवाददाताओं को यह जानकारी दी। भारत ने दस सरकारी प्रयोगशालाओं का भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और देश भर एवं अस्पतालों में भर्ती हो रहे लोगों के नमूनों की जांच और अनुक्रमण करेगा।
सरकार ऐसे अध्ययन करेगी, जिनमें यह देखा जाएगा कि कोविड के नए रूप और बीमारी की गंभीरता के बीच क्या संबंध है। राघवन ने कहा कि ब्रिटेन में पाए गए नए रूप की अधिक संक्रामकता चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 17 बदलाव आए हैं, जिनमें से आठ अहम हैं। इन बदलावों में से एक मानव कोशिकाओं में वायरल प्रवेश की संभावना को बढ़ाता है, जबकि अन्य को पहले जानवर मॉडल में संक्रामकता बढ़ाने और प्रसार से जोड़ा गया था। राघवन ने कहा, ‘ज्यादातर टीके स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करते हैं, जिसमें नए रूप में बदलाव आए हैं। लेकिन टीके हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं ताकि सुरक्षा करने वाले व्यापक ऐंटीबॉडीज पैदा किए जा सकें।’
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 टीकाकरण के लिए दो दिन पूर्वाभ्यास किया है। यह 28 और 29 दिसंबर को असम, आंध्र प्रदेश, पंजाब और गुजरात में किया गया। एक सरकारी समिति यह तय करने की व्यवस्था पर काम कर रही है कि पहले से किसी बीमारी वाले किन लोगों को टीका देने में प्राथमिकता दी जाए। इस समिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं। भारत में छह महीने बाद दैनिक नए मामलों की संख्या 17,000 और मौतों की तादाद 300 से नीचे आई है। देश में कुल सक्रिय मामलों में 60 फीसदी मामले केवल पांच राज्यों में हैं। इनमें महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा कि कोविड-19 के नए मामलों, सक्रिय मामलों और मौतों की संख्या में गिरावट से राहत मिली है। यह इस समय अन्य देशों से अलग रुझान है, जब बहुत से देश मुश्किल स्थितियों से जूझ रहे हैं। पॉल ने कहा, ‘ब्रिटेन का कोविड का नया रूप भारत समेत अन्य बहुत से देशों में पहुंच चुका है। इस रूप की फैलने की अपनी अलग रफ्तार हो सकती है, इसलिए हमें बहुत सतर्क रहना चाहिए।’ स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में कहा गया है कि देश में कुल मामलों में से 63 फीसदी मामले पुरुषों में आए हैं, जबकि 37 फीसदी मामले महिलाओं में आए हैं। कोविड से 70 फीसदी मौत पुरुषों की हुई है। इस बीमारी से 45 फीसदी मौत 60 साल से कम उम्र के लोगों की हुई है।