भारत में नए साल की शुरुआत कोरोना के टीके को अनुमति के साथ हो सकती है। देश के दवा विनियामक ने गुरुवार को इसका संकेत दिया। तीन टीकों के आपातकालीन उपयोग के अनुरोध पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति 1 जनवरी को बैठक करेगी। भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई वीजी सोमानी ने एक वेबिनार में कहा, ‘उम्मीद है कि नए साल में हमारे हाथ में कुछ ठोस होगा। फिलहाल मैं इतना ही संकेत दे सकता हूं।’ सोमानी ने आश्वासन दिया कि पहले एवं दूसरे चरण के परीक्षण निर्बाध एवं तेजी के साथ पूरे हो रहे हैं और इनमें डेटा की सुरक्षा या प्रभाव को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, ‘समय-सीमा को कम करना संभव हो गया है… नियामक ने आपातकालीन उपयोग के लिए आंशिक डेटा स्वीकार कर लिया है।’
नियामक ने टीके को मंजूरी देने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत प्रभाव के मानक पर खरा उतरने का निर्णय लिया है जो अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न प्लेटफार्मों पर टीकों को संभालना एवं विनिर्माण तथा नियंत्रण संबंधी डेटा और मान्य वर्गीकरण विधियों का सही तरीके से पालन करना एक बड़ी चुनौती होगी। सोमानी ने कहा, ‘उद्योग एवं अनुसंधान संगठन समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं… जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ हमने एक प्रतिबद्धता विकसित की है कि जो काफी तेजी से प्रतिक्रिया देगी।’
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) उमेश शालिग्राम ने बताया कि एसआईआई ने ऐस्ट्राजेनेका-ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी कोविड-19 टीके की 7.5 करोड़ खुराक का भंडारण किया है और जनवरी के पहले सप्ताह तक इसे 10 करोड़ खुराक तक बढ़ा दिया जाएगा। शालिग्राम ने कहा, ‘हर कोई इस उत्पाद की आपूर्ति करने के लिए हमारी ओर देख रहा है … अगर विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में हमारे पास आपातकालीन उपयोग की अनुमति होगी और हम आपूर्ति कर सकेंगे।’
एसआईआई जल्द ही कंपनी द्वारा कोरोना के लिए एक और स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन नोवैक्स के सुरक्षा संबंधी डेटा की भी घोषणा करेगी। भारत में टीकाकरण की पहली किस्त में 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण की योजना है, जिसमें स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पहली पंक्ति के कोरोना कार्यकर्ता और 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग शामिल हैं। बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हमने जो पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है और जो रणनीतिक योजना तैयार की है उसकी मदद से हमें विश्वास है कि हम इसे आगे ले जा सकेंगे और दुनिया को टीका वितरित कर पाएंगे।’
स्वरूप ने कहा कि यह पहली बार है कि 12 महीनों से कम समय में एक टीका विकसित किया गया है। अब तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सामाजिक आवश्यकताओं पर काम कर रहा था लेकिन नवोन्मेष के साथ अब तंत्र अद्वितीय नवाचार पारिस्थितिकी एवं राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ वितरित हो रहा है। केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति ने बुधवार को सीरम इंस्टीट्यूट तथा भारत बायोटेक द्वारा उपलब्ध कराई गई अतिरिक्त जानकारी के विश्लेषण के लिए 1 जनवरी को फिर से बैठक करने का फैसला किया है। ब्रिटेन के दवा नियामक ने बुधवार को ऑक्सफर्ड-ऐस्ट्राजेनेका टीके को मंजूरी दे दी।