कोविड टीकाकरण शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे टीकाकरण शुरू करने के लिए 2 जनवरी को पूर्वाभ्यास करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वे पूरी तरह तैयार हैं। इससे टीका आपूर्ति, शीत भंडारगृह शृंखला समेत भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन में उनकी क्षमता का पता चल पाएगा। यह टीकाकरण विश्व का अब तक का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम होगा, जिसके लिए सरकार 96,000 टीका लगाने वाले लोगों को प्रशिक्षित कर चुकी है। टीके से संबंधित सवालों के समाधान के लिए राज्य एक हेल्पलाइन 104 शुरू कर रहे हैं।
पूर्वाभ्यास का मकसद जमीनी स्तर पर को-विन एप्लीकेशन के उपयोग की व्यवहार्यता का आकलन करना और टीकाकरण कार्यक्रम की योजना एïवं क्रियान्वयन के बीच तालमेल को जांचना है। इससे राज्यों के चुनौतियों को चिह्नित कर पाने और वास्तविक टीका उपलब्ध कराए जाने से पहले खामियों को दूर करने की संभावना है। यह पूर्वाभ्यास इसलिए भी किया जा रहा है ताकि विभिन्न स्तरों के कार्यक्रम प्रबंधकों में आत्मविश्वास पैदा किया जा सके। सभी राज्यों की राजधानियों में शनिवार को तीन टीकाकरण स्थलों पर पूर्वाभ्यास होगा। इन स्थलों में कुछ उन दुर्गम जगहों पर हो सकते हैं, जहां लॉजिस्टिक उपलब्धता कमजोर है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में टीकाकरण शुरू करने के लिए 29,000 कोल्ड टेन पॉइंट, 240 वॉक-इन कूलर, 70 वॉइ-इन फ्रीजर, 45,000 आइस-लाइंड रेफ्रिजरेटर, 41,000 डीप फ्रीजर और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर की जरूरत होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय कह चुका है कि कुल 2.39 लाख टीका देने वालों में से 1.54 लाख वे ऑग्जिलियरी नर्सेज ऐंड मिडवाइव्स (एएनएम) होंगी, जो व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम में टीके लगाती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के परिचालन दिशानिर्देशों के मुताबिक प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्रत्येक टीकाकरण स्थल पर 25 जांच लाभार्थियों- स्वास्थ्य कर्मियों की पहचान करेगा और उनका डेटा को-विन ऐप में अपलोड किया जाएगा। पूर्वाभ्यास में सभी प्रस्तावित टीकाकरण स्थलों का भौतिक सत्यापन भी शामिल होगा ताकि पर्याप्त स्थान, लॉजिस्टिक इंतजाम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उदाहरण के लिए प्रत्येक राज्य में तीन मॉडल टीकाकरण स्थलों में ‘तीन कमरों के सेट-अप’ में अलग-अलग प्रवेश और निकास बिंदु होने चाहिए और जागरूकता गतिविधियों के लिए बाहर पर्याप्त जगह होनी चाहिए। राज्यों को टीकाकरण टीम चिह्नित करनी होंगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें मानक परिचालन प्रक्रिया की जानकारी है और टीका लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इस पूर्वाभ्यास में टीकाकरण के बाद किसी प्रतिकूल स्थिति को संभालने पर भी अहम ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा टीकाकरण स्थल पर संक्रमण नियंत्रण की गतिविधियों के पालन एवं प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाएगा ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। टीकाकरण दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सभी टीकाकर्मियों एनाफ्लैक्सिस के लक्षणों को पहचानने में प्रशिक्षित होने चाहिए और वे एक आयु के उपयुक्त अड्रेनलिन इंजेक्शन की खुराक देने में सक्षम होने चाहिए। उन्हें आगे के इलाज के लिए मरीज को समीपवर्ती एईएफआई प्रबंधन केंद्र या अस्पताल में पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस पूर्वाभ्यास में खंड और जिला स्तरों पर एक साथ निगरानी एवं समीक्षा शामिल होगी। इसके अलावा फीडबैक भी तैयार करना होगा, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। पहले चरण का पूर्वाभ्यास आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात और पंजाब में 28-29 दिसंबर को किया गया था। यह पूूर्वाभ्यास इन राज्यों के दो-दो जिलों में किया गया, जहां पांच टीकाकरण स्थल और प्रत्येक में 25 लाभार्थी चिह्नित किए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘इस पूर्वाभ्यास के दौरान परिचालन से संबंधित कोई बड़ी दिक्कत सामने नहीं आई। सभी राज्यों ने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए परिचालन दिशानिर्देशों और आईटी प्लेटफॉर्म में भरोसा दिखाया है।’