देश बिजली संकट से गुजर रहा है, ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे उद्योग और जनता को 24 घंटे बिजली आपूर्ति और बिजली की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपनी ऊर्जा योजना पर फिर से विचार करें।
इस संकट को नौकरियों और उद्योग के लिए बड़ा व्यवधान बताते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर हम सभी मिल जुलकर काम करें तो कहीं भी बिजली संकट नहीं होगा। बिजली उपलब्ध होगी और उचित दरों पर मिलेगी।’ मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे अक्षय व गैर अक्षय दोनों तरह की ऊर्जा पर ध्यान दें।
अप्रैल के अंत तक देश ने कई वर्षों में सबसे खराब बिजली संकट देखा, जिसमें 28 अप्रैल को सबसे ज्यादा 204.65 गीगावॉट बिजली की मांग थी, जबकि 192 एमयू बिजली की कमी थी। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी और बिहार सहित कई राज्यों में अंधेरा छाया रहा। 10 मई को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में मांग 191 जीडब्ल्यू और ऊर्जा की कमी 14.45 एमयू थी।
उन्होंने कहा, ‘मैं हर किसी से हर राज्य से कह रही हूं कि वे सभी स्रोतों से मिलने वाली अपनी ऊर्जा योजना पर फिर से विचार करें। बिजली 24 घंटे उपलब्ध हो सकती है और पूरे साल उपलब्ध हो सकती है। लोगों को बगैर कटौती या बगैर वोल्टेज की कमी के गुणवत्ता युक्त बिजली भी मिलेगी।’
मंत्री ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को भी यह देखना चाहिए कि किसी भी एक खास क्षेत्र में बैकवर्ड व फारवर्ड सेक्टर हैं। एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) को लेकर एक देश पर निर्भरता (चीन) का उदाहरण देते हुए उन्होंने सभी विनिर्माण क्षेत्र को कच्चे माल पर निवेश करने की वकालत की। चिप विनिर्माण का मसला उठाते हए उद्योग से उन्होंने कहा कि कच्चे माल में निवेश पर विचार करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र व राज्य दोनों के समर्थन की जरूरत है।
कपास एवं धागे की कीमत बढऩे को लेकर सीतारमण ने कहा कि सरकार उद्योग की चिंता से वाकिफ है और कपास औऱ धागे की कमी व ज्यादा दाम के बारे में उसे जानकारी है। कपास की कीमत दोगुने से ज्यादा होकर इस समय 95,000 रुपये प्रति कैंडी पहुंच गई है, जो इस सीजन की शुरुआत में अक्टूबर में 48,000 रुपये प्रति कैंडी थी। वाणिज्य एवं उद्योग और कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने 17 मई को सभी हिस्सेदारों की बैठक बुलाई है, जिससे इस मसले पर विचार हो सके।