RBI MPC Real Estate:: जिस रियल एस्टेट सेक्टर को लंबे समय से फंडिंग की कमी और ऊंची लागत ने धीमा कर रखा था, अब वहां उम्मीद की नई रोशनी दिखने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी RBI MPC ने ऐसे फैसले और संकेत दिए हैं, जो आने वाले महीनों में इस सेक्टर की दिशा बदल सकते हैं।
RBI MPC ने प्रस्ताव रखा है कि बैंकों को सीमित और सुरक्षित शर्तों के साथ REIT यानी रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट को लोन देने की अनुमति दी जाए। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए फंडिंग के नए रास्ते खुलेंगे। ऑफिस स्पेस, मॉल और बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश को सीधा सहारा मिलेगा और अटके हुए विकास कार्य दोबारा रफ्तार पकड़ सकते हैं।
अब तक REIT को बैंकों से सीधे लोन मिलने की सुविधा सीमित थी। RBI MPC के इस प्रस्ताव को बाजार एक साफ संदेश के तौर पर देख रहा है कि केंद्रीय बैंक रियल एस्टेट सेक्टर को दोबारा मजबूती देना चाहता है। REIT के जरिए आने वाला निवेश कम जोखिम वाला माना जाता है और बैंकों की भागीदारी से सेक्टर में भरोसा और गहराएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे संस्थागत निवेशकों का रुझान बढ़ेगा और कमर्शियल रियल एस्टेट में नई पूंजी का फ्लो देखने को मिलेगा।
RBI MPC ने इस बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। यह फैसला भी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत की खबर बनकर आया है। ब्याज दरें स्थिर रहने से उधारी की लागत फिलहाल नियंत्रित रहेगी, जिससे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग और लीजिंग गतिविधियों को सहारा मिलेगा।
ऑफिस स्पेस की मांग को इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है और डेवलपर्स को लंबी अवधि के निवेश फैसले लेने में स्पष्टता मिलेगी।
ANAROCK Group के चेयरमैन अनुज पुरी का मानना है कि RBI MPC द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला होम लोन लेने वालों के लिए राहत जरूर है, लेकिन इससे हाउसिंग डिमांड में कोई बड़ा उछाल नहीं आएगा। उनके मुताबिक, ब्याज दरें स्थिर रहने से मौजूदा होम लोन ग्राहकों की EMI नहीं बढ़ेगी, जिससे उन्हें फिलहाल किसी झटके का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं नए खरीदार भी अब ज्यादा भरोसे के साथ अपने घर खरीदने की योजना बना सकते हैं।
हालांकि अनुज पुरी का कहना है कि सिर्फ ब्याज दरों को स्थिर रखने से मकान सस्ते नहीं हो जाते। अफोर्डेबल और मिड-सेगमेंट घरों की मांग अभी भी बनी हुई है, लेकिन बढ़ती कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। अगर RBI MPC इस बैठक में ब्याज दरों में कटौती करता, तो बाजार में बैठे कई संभावित खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते थे।
उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर काफी कमजोर रहा। ANAROCK रिसर्च के मुताबिक, 2025 में कुल हाउसिंग बिक्री में अफोर्डेबल सेगमेंट की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 18 प्रतिशत रही, जबकि 2024 में यह 20 प्रतिशत थी। 2019 में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर रहा है। उनका कहना है कि बजट 2026–27 से भी अफोर्डेबल हाउसिंग खरीदारों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली, जबकि इस सेगमेंट को टैक्स छूट और ब्याज में प्रोत्साहन जैसे ठोस कदमों की सख्त जरूरत है।
हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बाजार की नजर अब RBI MPC की अगली चाल पर टिकी है। जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती होती है, तो इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर कहीं ज्यादा गहरा होगा। लोन सस्ता होगा, क्रेडिट आसानी से मिलेगा और उपभोक्ताओं की मांग में तेज उछाल आ सकता है।
को-वर्किंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी 315Work Avenue के फाउंडर मानस मेहरोत्रा के मुताबिक, RBI MPC का मौजूदा रुख रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिरता और भरोसा दे रहा है। उनका कहना है कि कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए यह दौर तैयारी का है और आगे ब्याज दरों में राहत मिलने पर सेक्टर नई ऊंचाई छू सकता है।
हालांकि अनुज पुरी ने RBI MPC के उस फैसले को सकारात्मक बताया, जिसमें बैंकों को नियमों के तहत REIT को सीधे लोन देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। उनके मुताबिक, इससे REIT के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा, लागत कम होगी और ऑफिस व रिटेल जैसे कमर्शियल सेगमेंट में विस्तार की रफ्तार तेज होगी। उन्होंने कहा कि यह कदम तभी ज्यादा असरदार होगा, जब इसके साथ सख्त रेगुलेटरी निगरानी और जोखिम नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए।
L&T Finance के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुदीप्ता रॉय ने RBI MPC के फैसलों को उम्मीद के अनुरूप बताया। उनका कहना है कि मौद्रिक नीति में घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और लगातार सपोर्ट का भरोसा झलकता है। RBI द्वारा लिक्विडिटी मैनेजमेंट को लेकर दिए गए संकेत हाल के दिनों में फंडिंग कॉस्ट पर बने दबाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
सुदीप्ता रॉय के अनुसार, MSME के लिए बिना गारंटी वाले लोन की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और REIT के जरिए रियल एस्टेट सेक्टर को लंबी अवधि की फंडिंग देने जैसे फैसले क्रेडिट सिस्टम के लिए बड़ा पॉजिटिव हैं। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते आए फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसी के ऐलानों से साफ है कि ग्रोथ को लेकर सरकार और RBI दोनों गंभीर हैं।
Embassy REIT के CEO अमित शेट्टी ने RBI के इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों को REIT को ट्रस्ट लेवल पर सीधे लोन देने की अनुमति मिलना एक बड़ा और दूरगामी फैसला है। इससे REIT को लंबी अवधि की स्थिर फंडिंग मिलेगी और उन्हें बार-बार रिफाइनेंसिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अमित शेट्टी के मुताबिक, यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि REIT मजबूत क्रेडिट क्वालिटी वाले, लंबी अवधि के निवेश ढांचे हैं। बैंक फंडिंग और कैपिटल मार्केट, दोनों विकल्प मिलने से REIT को अपने कारोबार और रणनीतिक योजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होगी। इसका सीधा फायदा निवेशकों को मिलेगा, क्योंकि मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर ग्रोथ के जरिए बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ेगी।