प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
रियल एस्टेट सेक्टर की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। घर खरीदना और बनाना आज हर किसी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बढ़ती जमीन की कीमतें, महंगाई और मंजूरी की मुश्किल प्रक्रिया खरीदारों और डेवलपर्स के लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं। हालांकि, सरकार के ‘सबके लिए घर’ मिशन ने उम्मीद की किरण जगाई है, लेकिन इस बार इंडस्ट्री चाहती है कि बजट में टैक्स में छूट, होम लोन पर बढ़ी ब्याज कटौती और अफोर्डेबल हाउसिंग की नई परिभाषा जैसे सुधार शामिल हों। साथ ही, मांग है कि परियोजनाओं की समयसीमा और मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाकर घर बनाने और खरीदने को सरल बनाया जा सके।
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो सिर्फ इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी घर खरीदना आसान और किफायती होगा। बजट 2026 में ये उम्मीदें अब असली इंतजार बन चुकी हैं।
सुदित के पारिख एंड कंपनी की पार्टनर अनीता बसुर के मुताबिक, इस बजट में रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए GST दर में कटौती सबसे अहम मांगों में से एक है। अभी होम प्रोजेक्ट्स पर 18% GST लगता है। इसे घटाकर 5% या 12% करने से घर बनाने वाले और खरीदार दोनों को फायदा होगा और इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
अनीता कहती हैं, “इसके अलावा अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा और होम लोन पर ब्याज कटौती की सीमा में बदलाव की जरूरत है। अभी अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा 45 लाख रुपये और 60-90 वर्ग मीटर तक सीमित है, जो बढ़ती महंगाई और जमीन की कीमतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। होम लोन पर ब्याज कटौती की सीमा को बढ़ाने की जरूरत है। पहली बार घर खरीदने वालों को ब्याज सब्सिडी देना भी इंडस्ट्री को मजबूती देगा और अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देगा।”
अनीता के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर का बड़ा झंझट है कैपिटल गेन रिइन्वेस्टमेंट और प्रोजेक्ट पूरा करने का समय। अभी घर या प्रोजेक्ट खत्म करने के लिए सिर्फ 3 साल मिलते हैं, जो अक्सर पर्याप्त नहीं होते। उनका कहना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 5 साल कर देना चाहिए, ताकि डेवलपर्स आराम से और अच्छे तरीके से घर बना सकें।
इसके अलावा, डेवलपर्स को अक्सर प्रोजेक्ट के लिए जरूरी मंजूरी और क्लियरेंस मिलने में बहुत झंझट झेलना पड़ता है। अनीता का कहना है कि सरकार ‘वन स्टॉप शॉप’ जैसी व्यवस्था बनाए, जैसे स्टार्टअप्स के लिए होती है। इससे सभी मंजूरी एक ही जगह मिलेंगी, काम जल्दी होगा और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
रियल एस्टेट इंडस्ट्री का मानना है कि ये सुधार केवल इंडस्ट्री को मजबूत नहीं करेंगे, बल्कि आम लोगों के लिए घर खरीदना और भी आसान बनाएंगे। बजट 2026 में अगर ये बदलाव शामिल किए जाते हैं, तो ‘सबके लिए घर’ का सपना और करीब होगा।
सरकार इस पहल के तहत परिवार की महिलाओं को घर का मालिक या सह-मालिक (Co-owner) बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि बजट 2026 में इन सब्सिडी योजनाओं को और अधिक विस्तार मिल सकता है ताकि समाज के हर वर्ग तक पक्के घर की पहुंच हो सके।
अनीता कहती हैं, “होम लोन लेने वालों के लिए सबसे बड़ी राहत ब्याज कटौती (Interest Deduction) की सीमा में छिपी है। अभी में यह सीमा 2 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा, पहली बार घर खरीदने वालों के लिए ब्याज में सब्सिडी की मांग भी जोर पकड़ रही है।”
अगर बजट 2026 में इन नीतिगत सुधारों को जगह मिलती है, तो रियल एस्टेट सेक्टर न सिर्फ खरीदारों के लिए सस्ता होगा, बल्कि डेवलपर्स के लिए भी काम करना आसान हो जाएगा।