कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर इसका उपचार और टीका तलाशने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। अहमदाबाद की कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा विकसित सेप्सिस (जानलेवा संक्रमण) की दवा सेप्सिवैक तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण के लिए तैयार है।
पहले के चरणों में परिणाम सकारात्मक रहने से अब तीसरे चरण के परीक्षण की तैयारी चल रही है। सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत किए गए परीक्षण के आंकड़ों को जल्द ही औषधि नियामक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ताकि कोविड-19 मरीजों के उपचार में इसके आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल सके।
सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) के निदेशक राम ए विश्वकर्मा ने कहा, ‘दूसरे चरण के परीक्षण के आवश्यक आंकड़े 15 जुलाई तक आ जाएंगे और उसके बाद हम यह देखने के लिए नियामक से संपर्क करेंगे कि क्या इसका कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ आपातकालीन इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, दो चरणों में तीसरे चरण के परीक्षण के लिए भी हमें मंजूरी मिल गई है। पहले 600 रोगियों पर और फिर 500 अन्य रोगियों पर इसका इसका परीक्षण किया जाएगा।’
दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च, दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और एम्स भोपाल में किए गए। जबकि तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण के लिए इसमें दो जगहों- एम्स रायपुर और बीएचयू संस्थान- को शामिल किया जाएगा।
सेप्सिवैक प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने वाली दवा है। अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि यह दवा द्विआयामी तरीके से काम करेगी- पहला, पैथोजेन के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने और साइटोकाइन आईएल-6 के उत्पादन को नियंत्रित करने में। इससे रोगी के आंतरिक अंगों को वायरस के हमलों से बचाया जा सकता है।