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बीमा में एफडीआई बढ़ाने का होगा मिला-जुला असर

Last Updated- December 12, 2022 | 7:10 AM IST

बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा में छूट देने के निर्णय का नए निवेश पर मिलाजुला असर हो सकता है।  उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक यदि विदेशी संयुक्त उद्यम के साझेदार हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं जबकि भारतीय साझेदार स्वामित्व छोडऩे के लिए तैयार हैं तो पैसा मौजूदा साझेदारों के बीच बंट जाएगा। जब तक कि विदेशी साझेदार हिस्सेदारी बढ़ाने के बाद पैसा निवेश करने का निर्णय नहीं लेता है तब तक कोई नया निवेश नहीं आएगा।
नया निवेश केवल तभी आएगा जब ऐसी कंपनियां जो स्वामित्व नियम के कारण अब तक भारतीय बीमा क्षेत्र से अलग रही थीं, नए उद्यम स्थापित करने का निर्णय लेती हैं। ईवाई में वित्त सेवाओं के पार्टनर संदीप घोष ने कहा, ‘यदि विदेशी कंपनियां जो अब तक भारत में नहीं आई हैं यदि नए उद्यम के तौर पर यहां आना चाहती हैं तो इससे बीमा क्षेत्र में नई विदेशी पूंजी आएगी। लेकिन, यदि वे मौजूदा कंपनी में निवेश करने का निर्णय लेती हैं तो पैसा कंपनी के खाते में न जाकर शेयरधारकों के खातों में चला जाएगा। यही स्थिति तब भी होगी जब यदि कोई मौजूदा विदेशी शेयरधारक मौजूदा संयुक्त उद्यम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता है।’
पीडब्ल्यूसी इंडिया में बीमा के पार्टनर और लीडर जयदीप रॉय ने कहा, ‘ऐसा मुश्किल है कि सभी भारतीय शेयरधारक नियंत्रण छोडऩा चाहेंगे, विशेष तौर पर वे जो सूचीबद्ध हैं या बड़े कारोबारी घरानों से संबद्ध हैं।’
उन्होंने कहा, ‘स्पेक्ट्रम के मध्य के अंत में कुछ सौदों में निवेश आ सकता है। हालांकि, पहले 50 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं मिलने तक जो कंपनियां यहां नहीं आना चाहती थीं अब आती हैं तो अपनी साथ मोटी पूंजी लाएंगी।’
सरकार ने बजट में एफडीआई की सीमा को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने की घोषणा की थी, जिसे बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसमें सुरक्षा उपायों के साथ विदेशी स्वामित्व और नियंत्रण की अनुमति देने की घोषणा की गई है।
लेकिन बीमाकर्ताओं के बोर्ड के अधिकांश निदेशकों और प्रमुख प्रबंधन व्यक्तियों को निवासी भारतीय होना चाहिए। बीमाकर्ताओं के कम से कम 50 फीसदी निदेशक स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए।
साथ ही, बीमाकर्ताओं को लाभ का एक निश्चित प्रतिशत सामान्य रिजर्व के तौर पर रखना होगा। सरकार की ओर से इस पर अंतिम मसौदा अभी तक प्रस्तुत नहीं किया गया है।
आश्विन पारेख एडवाइजरी के प्रबंध पार्टनर आश्विन पारेख ने कहा, ‘यदि सरकार निवेशक के अनुकूल वातावरण बनाने में सक्षम है और सभी सूक्ष्म बातों का खयाल रख सकती है तब कहीं अगले तीन वर्ष में कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये बीमा क्षेत्र में आ सकता है।’
2015 में जब सरकार ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी किया था तब यदि निजी क्षेत्र की सभी कंपनियों ने विदेशी साझेदार को 49 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश की होती तो देश में 80,000 करोड़ रुपये का निवेश आ सकता था। लेकिन केवल 21 फीसदी ने ऐसा किया था और 17,000 करोड़ रुपये के लगभग इक्विटी हासिल हो पाई थी।
मार्च 2020 के मुताबिक बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश 37.41 फीसदी है। केवल 9 निजी बीमाकर्ता कंपनियों में विदेशी निवेश 49 फीसदी है। देश में 23 निजी जीवन बीमा कंपनियां हैं। सामान्य बीमा उद्योग में 21 निजी बीमा कंपनियां हैं और इसमें एफडीआई महज 28.18 फीसदी है।

First Published - March 11, 2021 | 11:35 PM IST

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