वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज आत्मनिर्भर कार्यक्रम के तहत देसी उद्योग को बढ़ावा देने को लेकर सरकार की हो रही आलोचना पर जोरदार हमला बोला। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की ओर से आयोजित इंडिया वर्चुअल एफएमसीजी सप्लाई चेन एक्सपो 2020 के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए गोयल ने कहा कि भारतीय सामान के लिए उचित और परस्पर लेनदेन वाली दृष्टिकोण की जरूरत थी और कारोबार बराबर वालों के बीच होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘आजकल जब कभी मैं घरेलू उद्योग को बढ़ावा देता हूं तो सुनने में आता है कि हम लाइसेंस राज के दिनों की ओर बढ़ रहे हैं। इतने वर्षों से मैं यह सुनता आ रहा था कि स्थानीय और वैश्विक कंपनियों के बीच एक समान अवसर का अभाव है। अब जब हम इस स्थिति में सुधार करने का प्रयास कर रहे हैं तो हमारी आलोचना बढ़ रही है।’
भारत अपने आत्मनिर्भर कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर उत्पादों और पुर्जों के आयात विशेष तौर पर चीन से आयात पर प्रतिबंध बढ़ा रहा है।
पिछले हफ्ते विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी कर विभिन्न आकार के स्क्रीन वाले टेलीविजन सेटों को आयातों के लिए प्रतिबंधित सामानों की सूची में रखा था। पहले ये मुक्त आयात श्रेणी में थे।
आयातों पर नई रोक चीन सहित भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों से विदेशी निवेशों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की अनिवार्यता के निर्णय के बाद लगाई गई है। रेल मंत्री का कार्यभार भी संभाल रहे गोयल ने कहा कि सरकार 2009 और 2011 के बीच हुए सभी मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा कर रही थी और इनमें से अधिकांश को विषमतापूर्ण पाया है। उन्होंने कहा, ‘हमारा आकलन है कि पहले हुए मुक्त व्यापार समझौतों में देश में विदेशी सामानों के आसानी से प्रवेश की अनुमति दी गई है। लेकिन भारतीय सामानों के दूसरे देश में प्रवेश को वैसी ही अनुमति नहीं मिली है। यह व्यवस्था लंबे वक्त तक नहीं चल सकती है। देशों को समझना चाहिए यदि वे 130 करोड़ की आबादी वाले बाजार तक पहुंच चाहते हैं तो उन्हें भी हमारे लिए अपने बाजार तक पहुंच मुहैया करानी होगी।’
गोयल ने भारतीय इस्पात, दवा और टायरों का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी बाजारों में इनके प्रवेश की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए यूरोपीय देशों ने टायरों के आयात पर भारत सरकार की ओर से लगाई गई तकनीकी मानकों का विरोध किया है जबकि उन्होंने भारत से टायरों के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है।
उन्होंने कहा, ‘यह समय भारत के लिए भारत पर ध्यान देने का है जहां असेंबली के लिए पुर्जों के आयात या सेमी नॉक्ड डाउन इकाई की बजाय देशीकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है। भारतीय सामानों के गुणवत्ता मानक में भी सुधार किए जाने की जरूरत है।’
टीवी के लिए सरकार के पास पहले से ही चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम मौजूद है और एयर कंडीशनर के लिए अब विनिर्माण कार्यक्रम और मोबाइल फोन के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शुरू कर चुकी है।