किसानों ने ठुकराया प्रस्ताव

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 8:25 PM IST

केंद्र ने आंदोलनरत किसानों को शांत करने के लिए आज उनके सामने कई प्रस्ताव रखे, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित मौजूदा खरीद व्यवस्था को जारी रखने का लिखित आश्वासन भी शामिल है। सरकार ने नए कृषि कानूनों में अन्य बहुत से बदलावों की भी पेशकश की है, जिनमें विनियमित एपीएमसी के बाहर निजी मंडियों को पंजीकृत करने और शुल्क लगाने का राज्यों को अधिकार देना और मौजूदा विवाद समाधान व्यवस्था से संतुष्ट न होने पर किसानों को दीवानी अदालत में जाने का विकल्प देना आदि शामिल हैं।
केंद्र की इन पेशकशों में कहा गया है कि राज्य एपीएमसी से बाहर कारोबारियों के पंजीकरण के लिए नियम बना सकते हैं। व्यापार अधिनियम में कहा गया है कि केवल पैन धारक कोई भी व्यक्ति एपीएमसी के बाहर कृषि उपज खरीद सकता है।
इन प्रस्तावों से असंतुुष्ट किसान समूहों ने पेशकश ठुकरा दी और इन अधिनियमों को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। आंदोलित किसानों ने कहा कि वे इन अधिनियमों में अपने बदलावों का संस्करण भेजेंगे। उन्होंने आगे भी अपने आंदोलन को जारी रखने की चेतावनी दी है।
इस बीच केंद्र सरकार ने किसानों के एक समूह की यह मांग पूरी तरह खारिज दी कि तीनों कृषि अधिनियमों को रद्द किया जाए। केंद्र ने कहा कि वह इन अधिनियमों के उन सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार है, जिन पर किसानों को कोई संदेह या भ्रम है।
बुधवार रात गृह मंत्री अमित शाह के साथ चार घंटे तक चली बैठक के बाद लिखित आश्वासन की पेशकश की गई। केंद्र सरकार ने नए कृषि अधिनियमों में बदलावों के अलावा किसानों को यह आश्वासन भी दिया कि बिजली सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। इसमें बिजली विधेयक प्रारूप के प्रस्ताव के अनुसार कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन पर नए अध्यादेश में पराली जलाने पर जुर्माने की किसानों की शिकायत का उपयुक्त समाधान किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने किसानों को यह भरोसा दिलाने की भी कोशिश की कि नए कृषि अधिनियम किसी भी तरह उनकी भूमि पर अतिक्रमण नहीं करेंगे। सरकार ने कहा कि वह इन अधिनियमों के प्रावधानों को और मजबूत करना चाहती है ताकि किसानों के दिमाग में बैठे हुए संदेहों को दूर किया जा सके।
केंद्र ने अनुबंध कृषि अधिनियम में अनुबंधों के पंजीकरण पर कहा कि पहले से यह प्रावधान मौजूद है कि राज्यों के पास खरीदार और किसान के बीच ऐसे समझौतों को पंजीकृत करने का अधिकार होगा। लेकिन जब तक ऐसे किसी प्राधिकरण का गठन नहीं हो जाता है, तब तक ऐसे करार की एक प्रति संबंधित उपखंड अधिकार (एसडीएम) के पास जमा करानी होगी।
इस बीच कांग्रेस के राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के शरद पवार, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा और द्रविड मुन्नेत्र कझगम (द्रमुक) के टीकेएस इलांगोवन समेत विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे सरकार को आंदोलनरत किसानों की मांगें मानने और कृषि अधिनियमों को रद्द करने के लिए राजी करें। इन तीनों अधिनियमों को हाल में राष्ट्रपति ने मंजूरी दी है, जिसके बाद वे कानून बन गए हैं।

First Published : December 9, 2020 | 10:58 PM IST