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डिजिटल हेल्थ मिशन से सस्ता हो सकता है स्वास्थ्य बीमा

Last Updated- December 15, 2022 | 2:16 AM IST

नैशनल डिजिटल हेल्थ मिशन न केवल पॉलिसीधारकों के लिए एक वरदान साबित होगा बल्कि स्वास्थ्य बीमा उत्पादों के बेहतर मूल्य निर्धारण में बीमाकर्ताओं के लिए भी समान रूप से लाभदायक साबित होगा। सरकार की ओर से घोषित इस मिशन का कार्य नागरिकों का डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार करना है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस मिशन को अपनाने पर स्वास्थ्य बीमा उत्पादों के दामों में कमी आ सकती है।   

स्वास्थ्य बीमा पर एसोचैम की राष्ट्रीय ई-बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) में गैर जीवन (नॉन लाइफ) बीमा की सदस्य टीएल अलमेलु ने कहा, ‘सरकार ने हाल ही में नैशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की घोषणा की है और बीमा कर्ताओं को इसका लाभ उठाना चाहिए। इसके माध्यम से वह पॉलिसीधारकों को अपना स्वास्थ्य रिकॉर्ड इस प्लेटफार्म पर साझा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। इससे न केवल पॉलिसीधारकों को मदद मिलेगी बल्कि उत्पादों के बेहतर मूल्य निर्धारण में बीमा उद्योग को भी लाभ होगा।’ फिलहाल स्वास्थ्य बीमा उत्पादों का मूल्य मुख्य तौर पर पहले के अनुभव के आधार पर निर्धारित किया जाता है। सभी बीमांकिक गणना ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित होता है। और, बीमा कंपनियों के पास उत्पाद की कीमत निर्धारण के समय पर हमेशा सारे आंकड़े तैयार नहीं होते हैं जिससे कई बार बीमाकर्ताओं के लिए घाटे का अनुपात अधिक हो जाता है। सामान्य बीमा क्षेत्र की ज्यादातर बीमा कंपनियां जोखिम अंकन लाभों को लेकर जूझ रही हैं जिसकी प्रमुख वजह कीमत निर्धारण का मसला है।    

अलमेलु ने कहा, ‘यदि पॉलिसीधारक प्लेटफार्म पर अपना स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझा करते हैं तो इस स्थिति को बदला जा सकता है। बीमाधारकों को ऐसा करने से लाभ होगा क्योंकि कीमतें ज्यादा वास्तविकता पर आधारित होंगी और संभवत इस में कमी आएगी।’

नैशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र कार्ड तैयार करना है जिसमें जनसांख्यिकीय और स्थान, परिवार/संबंध और संपर्क की जानकारी होगी। इससे व्यक्ति की पहचान करने, उसका सत्यापन करने और उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड का पता लगाने में इस्तेमाल किया जाएगा।

अलमेलु ने यह भी कहा कि मौजूदा महामारी के कारण भारतीय बाजार में स्वास्थ्य बीमा की हिस्सेदारी बहुत कम समय में 27 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी हो गई है। बाजार हिस्सेदारी में यह उछाल मार्च और जुलाई के बीच की अवधि में आई है।

First Published - September 12, 2020 | 12:17 AM IST

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