केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि कोविड-19 के टीकों को बौद्धिक संपदा कानून से अस्थाई रूप से मुक्त करने के भारत के प्रस्ताव पर बहुपक्षीय समर्थन और जल्द समाधान की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा आम सहमति बढ़ाने, तकनीक के हस्तांतरण और कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी लाए जाने की जरूरत है, जिससे कोविड-19 से उपजे संकट से उबरा जा सके। मंत्री ने विभिन्न देशों से यह भी अनुरोध किया कि वे उन देशों के साथ टीकों को उदारता से साझा करें, जिन्हें इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है।
विश्व आर्थिक मंच के वैश्विक व्यापार परिदृश्य सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि डब्ल्यूटीओ में बहुपक्षीय समर्थन मिलेगा और इस पर आम राय बनाई जा सकेगी। यहां तेजी बहुत अहम है और अगर इस पर बातचीत में महीनों लगते हैं और हमें इसके लिए कच्चा माल नहीं मिलता है तो हम घूम-फिरकर वहीं पहुंच जाएंगे।’
कार्यक्रम में मौजूद डब्ल्यूटीओ के डायरेक्टर जनरल गोजी ओकोंजो इवेला ने कहा कि ट्रिप्स से छूट के अलावा देशों को निर्यात प्रतिबंध कम करने और टीके की उपलब्धता व उत्पादन सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘हम किसी चीज पर महीनों और वर्षों चर्चा का भार वहन नहीं कर सकते। हम जिंदगियां जाने पर बात कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि सभी देश जल्द ही वार्ता के लिए साथ आएंगे और चर्चा शुरू करेंगे।’ उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि जुलाई तक सदस्य देश ट्रिप्स से छूट के मसले पर किसी सहमति पर पहुंच जाएंगे और आखिरी फैसला दिसंबर तक हो जाएगा, जब डब्ल्यूटीओ की मंत्रिमंडलीय परिषद की बैठक होगी।
अक्टूबर 2020 में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने बौद्धिक संपदा अधिकार के कारोबार संबंधी पहलुओं (ट्रिप्स) से सीमित छूट दिए जाने का प्रस्ताव किया था, जिससे ज्यादा से ज्यादा देशों की मदद की जा सके, खाकर मध्य व कम आय वाले देशों तक कोविड-19 के टीके की पहुंच सुनिश्चित हो सके। विकसित देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, लेकिन पिछले एक सप्ताह में अमेरिका और न्यूजीलैंड ने कोविड-19 टीके पर पेटेंट सुरक्षा से माफी का समर्थन किया है।
गोयल ने आगे कहा कि उत्पादन और टीकोंं की आपूर्ति बढ़ाने के साथ भारत कम विकसित देशों को सहयोग करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा और यह वक्त की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘हम सभी दवा कंपनियों और अन्य विकसित देशों को आश्वस्त करते हैं कि हमने हमेशा बौद्धिक संपदा के अनुपालन को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है और ऐसा हमेशा करते रहेंगे। मौजूदा असाधारण स्थिति में असाधारण कदम उठाने की जरूरत है।’ गोयल ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) संतुलित समझौता नहीं था, क्योंकि इससे भारत के किसानों, छोटे कारोबारियों, डेयरी उद्योग पर बुरा असर पड़ता और इसलिए यह उचित था कि भारत उसमें शामिल न हो। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र, पारदर्शिता, कानून का नियम, न्यायालयों की स्वतंत्रता, निवेश नियम आदि के मामले में भारत अन्य इकाइयों व देशों जैसे ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका की तरह ही नियमों का पालन करता है। इन देशों के साथ भारत का कारोबार कुल मिलाकर संतुलित है।’