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‘रेटिंग वाली इकाइयों की क्रेडिट गुणवत्ता सुधरी’

Last Updated- December 10, 2022 | 2:11 AM IST

रेटिंग एजेंसी केयर के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में रेटेड इकाइयों की मोडीफाइड क्रेडिट रेशियो (एमसीआर) में शामिल क्रेडिट गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसमें पहली दो तिमाहियों में स्थिरता रही थी। परिचालन, नकदी की स्थिति, पूंजीगत ढांचा और कर्ज सेवाओं के मानकों में सकारात्मक वित्तीय स्थिति की वजह से यह सुधार हुआ है।
वित्त वर्ष 21 की तीसरी तिमाही में एमसीआर बढ़कर 0.96 रहा है, जिससे ऋण की गुणवत्ता में मामूली सुधार  के संकेत मिलते हैं। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली दो तिमाही में एमसीआर 0.94 था। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण कई क्षेत्रों में अभी भी आर्थिक व्यवधान बना हुआ है, जिसकी वजह से ऋण की गुणवत्ता को लेकर अभी भी दबाव बना हुआ है। आर्थिक रिकवरी असमान है। वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में यह अनुपात एक के नीचे रहा है, जिससे समीक्षा की अवधि के दौरान रेटिंग नीचे जाने की संख्या अधिक होने और रेटिंग ज्यादा होने वाली इकाइयों की संख्या कम होने के संकेत मिलते हैं।
क्रेडिट की गुणवत्ता में सुधार वाले क्षेत्रों में कृषि और संबंधित क्षेत्र, सीमेंट, शिक्षा, बिजली उथ्पादन, चीनी, स्वास्थ्य, दवा और आईटी शामिल हैं।
बहुसंख्य इकाइयों (75 प्रतिशत) ने पाया कि उनकी क्रेडिट रेटिंग 2020-21 की तीसरी तिमाही में फिर से पुष्ट हुई है। वहीं ऐसी इकाइयों का अनुपात भी बढ़ा है, जिनकी रेटिंग पिछली तिमाही और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बढ़ी है।
केयर ने कहा है कि 2020-21 की तीसरी तिमाही में रेटिंग नीचे जाने की प्रमुख वजह कोविड-19 के कारण हुआ व्यवधान है। परिवहन, रियल एस्टेट, निर्माण, ऑटो, आतिथ्य, एनबीएफसी और थोक व खुदरा कारोबार के क्षेत्र में क्रेडिट की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ी है।
महामारी और उसके कारण हुई बंदी की वजह से कामकाज घट गया और बिक्री, संग्रह, नकदी और कुल मिलाकर कारोबार के मुनाफे पर असर पड़ा है। इन सब वजहों ने इन इकाइयों की वित्तीय प्रोफाइल पर विपरीत असर डाला है। इसके साथ ही कर्ज मिलने मं देरी, गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल खराब होने, परिचालन और रखरखाव जोखिम बढऩे, पूंजीगत ढांचा कमजोर होने और पूंजी डालने में देरी होने की वजह से रेटिंग घटी है। अप्रत्याशित व्यवधानों के बावजूद घरेलू इकाइयों की कुल मिलाकर क्रेडिट गुणवत्ता 2012-13 की तुलना में बेहतर है।

दिल्ली-मेरठ परियोजना में चीनी कंपनी को ठेका

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने चीन की कंपनी शांघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद के बीच 5.6 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का ठेका दिया है, जो दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना का हिस्सा है। देश की पहली क्षेत्रीय त्वरित रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना पर काम कर रही एनसीआरटीसी ने कहा कि यह ठेका निर्धारित प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों के  मुताबिक दिया गया है। एनसीआरटीसी के प्रवक्ता ने कहा, ’82 किलोमीटर लंबे दिल्ली गाजियाबाद-मेरठ गलियारे के सभी सिविल कार्यों के ठेके अब दिए जा चुके हैं और समय से परियोजना पूरी करने के लिए रफ्तार से काम चल रहा है।’ एजेंसियां

First Published - January 4, 2021 | 12:06 AM IST

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