भारत बायोटेक ने परीक्षण घटाए

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 10:42 PM IST

टीके बनाने वाली हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने अपने कोविड-19 टीके के उम्मीदवार कोवैक्सीन के दूसरे चरण के परीक्षणों का आकार घटाकर आधा कर दिया है। अब यह केवल 380 स्वयंसेवकों को ही खुराक देगी ताकि परीक्षणों की रफ्तार तेज की जा सके। कंपनी को पहले चरण के परीक्षणों से अच्छे प्रतिरक्षण के आंकड़े मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि कंपनी तीसरे चरण में बड़े पैमाने पर, करीब 30,000 लोगों पर परीक्षण करने की योजना बना रही है, जिससे उनके टीका उम्मीदवार के कारगर होने की परीक्षा होगी।
आम तौर पर प्रतिरक्षण का मतलब किसी टीके की इसे लगाए जाने वाले व्यक्ति में माप सकने योग्य रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने से है। भारत बायोटेक दूसरे चरण के अध्ययन में टीके का परीक्षण 12 साल की उम्र से अधिक के बच्चों पर भी कर रही है। इसने पहले चरण में उम्मीदवार का केवल वयस्कों पर परीक्षण किया था।
कोवैक्सीन का परीक्षण पहले और दूसरे चरण में 1,125 लोगों पर होना था। इसमें 375 स्वयंसेवकों को पहले चरण के अध्ययन में टीका लगाया जा चुका है, इसलिए दूसरे चरण के अध्ययन में 750 लोगों को टीका लगाया जाना था। अब इन स्वयंसेवकों की संख्या घटाकर 380 कर दी गई है। भारत बायोटेक ने इसकी पुष्टि की, मगर और जानकारियां साझा करने से इनकार कर दिया।
सूत्रों ने बताया कि पहले चरण के परीक्षण के बाद स्वयंसेवकों में अच्छा प्रतिरक्षण दिखने से यह फैसला लिया गया। इसके अलावा जिन स्वयंसेवकों को टीका लगाया गया, उन्होंने बुखार एवं शरीर में दर्द के अलावा अन्य किसी बड़े दुष्प्रभाव की शिकायत नहीं की। भारत बायोटेक का कोवैक्सीन टीका निष्क्रिय सार्स-सीओवी-2 वायरस पर आधारित है, जो  दो दिन के अंतर पर दो दिन लगाया गया। इस समय दूसरे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण चल रहे हैं। भारत बायोटेक पहले और दूसरे चरण के अध्ययन के आंकड़े एक साथ जारी करेगी। कंपनी ने पहले चरण के परीक्षणों के कोई अंतरिम आंकड़े प्रकाशित नहीं किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे चरण के परीक्षणों का आकार कम करने से परीक्षणों की प्रक्रिया में तेजी आएगी क्योंकि यह पहले और दूसरे चरण के आंकड़ों के परीक्षण और नियामक से मंजूरी मिलने के बाद तीसरे चरण में पहुंच सकती है। भारत बायोटेक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नैशनल इंस्टीट््यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर कोवैक्सीन विकसित कर रही है। आईसीएमआर देश का शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान है।
इस बीच कंपनी तीसरे चरण में व्यापक पैमाने पर परीक्षण की तैयारी कर रही है ताकि कोवैक्सीन के कारगर होने का परीक्षण किया जा सके। इन अध्ययनों में यह जांचा जाता है कि टीका कितना प्रभावी है या टीका लगाए जाने के बाद कितने लोगों को वह बीमारी नहीं होती है। अगर इसका परीक्षण प्लसीबो के मुकाबले किया जाए तो प्लसीबो समूह में टीका समूह की तुलना में बीमारी के ज्यादा मामले होने चाहिए। इस महीने की शुरुआत में देश के दवा नियामक ने भारत बायोटेक को कहा था कि वह तीसरे चरण के परीक्षणों के लिए अपने प्रस्ताव में कुछ बदलाव करे। भारत बायोटेक पहले और दूसरे चरण के अध्ययन के अंतरिम आंकड़े पहले ही विषय विशेषज्ञ समिति  को दिखा चुकी है।

ऑक्सीजन का सरकार करेगी आयात
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्दियों के मौसम में कोविड-19 के मामले बढऩे की आशंका के मद्देनजर अपनी तैयारियों के तहत तरल ऑक्सीजन का आयात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि  इसकी कमी ना हो। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने एक लाख टन तरल ऑक्सीजन की खरीद के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार को एक वैश्विक निविदा जारी की।  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ऑक्सीजन, केंद्र और राज्य सरकार के तहत आने वाले विभिन्न अस्पतालों के लिए खरीदी जा रही है। भाषा

First Published : October 14, 2020 | 11:06 PM IST