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किसानों की अदालत से गुहार

Last Updated- December 14, 2022 | 8:20 PM IST

एक तरफ सरकार ने कोविड-19 नियमों के उल्लंघन के लिए दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है। दूसरी तरफ किसानों ने पलटवार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर कर उससे कृषि कानूनों पर बने हुए गतिरोध को खत्म करने के लिए दखल देने का आग्रह किया है।
प्रदर्शन स्थल पर तैनात दिल्ली पुलिस के दो अधिकारी कोविड-19 संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है। किसान समूह कल अपना विरोध तेज करेंगे। वे दिल्ली के बाहरी इलाकों के सभी टोल नाकों पर धरना देंगे और पटरियों पर बैठकर रेल रोकेंगे। वे नए कृषि कानूनों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। वे निजी खरीद के खिलाफ 14 दिसंबर को आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों ने कुछ कॉरपोरेट घरानों द्वारा तैयार माल के बहिष्कार की घोषणा की है। इन घरानों में रिलायंस जियो, अदाणी और अंबानी के अन्य उत्पाद शामिल हैं।
ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमृतसर से कई सौ ट्रक और ट्रक्टर और किसानों को लेकर दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार जैसे राजनेताओं ने सरकार को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इन कृषि कानूनों पर व्यापक चर्चा की मांग की थी। इसके बाद उन्हें संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया। भारतीय किसान यूनियन ने किसानों के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में दलील दी कि ये कृषि कानून संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए गए हैं।
इस याचिका में कहा गया है, ‘इन अधिनियमों को मौजूूदा स्वरूप में लागू करने से किसान समुदाय के लिए संकट पैदा होगा। इनसे एक समानांतर बाजार खुलेगा, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं होगा और जिसमें किसानों के शोषण की पूरी गुंजाइश होगी।’
इसमें कहा गया है, ‘किसानों को सुरक्षा कवच मुहैया कराने वाली कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) के बिना बाजार बहुुराष्ट्रीय कंपनियों के लालच की भेंट चढ़ जाएगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को किसानों की स्थिति की नहीं बल्कि अपने लाभ की चिंता है।’ याचिका में कहा गया कि इन कानूनों से कृषि का निगमीकरण हो जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा, ‘अगर केंद्र हमारी 15 में से 12 मांगें मानने को तैयार है तो इसका मतलब है कि ये कानून सही नहीं हैं। ऐसे में इन्हें रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए?’
सरकार ने अपने स्तर पर किसानों से संपर्क का एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया है। कैबिनेट मंत्रियों की एक सूची तैयार की जा रही है। इन मंत्रियों को समूहों में देश के 700 जिलों को भेजा जाएगा। ये मंत्री  समूह किसानों को इन कानूनों के फायदों के बारे में बताएंगे। देश के विभिन्न स्थानों पर 100 संवाददाता सम्मेलन आयोजित होंगे। भाजपा ने इस संपर्क अभियान से राज्य अध्यक्षों और प्रभारियों को भी जोड़ा है, जो वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगे।

First Published - December 11, 2020 | 11:43 PM IST

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