अमेरिका ने कोविड-19 टीकों के जुड़ी बौद्धिक संपदा अधिकार की सुरक्षा की शर्त कुछ समय के लिए खत्म करने का फैसला किया है। इसका मकसद अधिक से अधिक देशों को कोविड-19 से बचाव के टीके तक पहुंचने में मदद करना है। अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने कहा कि यह महामारी खत्म करने के लिए अमेरिका ने बौद्धिक संपदा सुरक्षा की शर्त अस्थायी तौर पर खत्म करने का असाधारण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसके लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चल रही चर्चा में भी सक्रिय सहभाग करेगा। भारत और दक्षिण अफ्रीका के साथ डब्ल्यूटीओ के 57 अन्य सदस्य देशों ने बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते के व्यापार संबंधित पहलू (ट्रिप्स) के कुछ खास प्रावधान अस्थायी तौर पर खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। यदि प्रस्ताव मान लिया जाता है तो दुनिया के कई देशों के सामने कोविड-19 टीके बनाने की राह में आ रही कानूनी अड़चन खत्म हो जाएगी। ताई के 5 मई के बयान में कहा गया, ‘दुनिया भर के लिए स्वास्थ्य संकट है और कोविड- 19 महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच कुछ असाधारण कदम उठाए जाने की जरूरत है। अमेरिका बौद्धिक संपदा की सुरक्षा का बहुत हिमायती है मगर कोविड-19 महामारी समाप्त करने के लिए वह इस व्यवस्था में ढील दिए जाने का समर्थन करता है।
इसे अमली जामा पहनाने के लिए हम डब्ल्यूटीओ में चल रही बातचीत में सक्रिय सहभाग करेंगे।’ ताई ने इस सिलसिले में फाइजर और एस्ट्राजेनेका जैसी टीका कंपनियों से बात भी की है। पिछले सप्ताह कुछ अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडन से भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की थी। इसके अलावा यह आलोचना भी बढ़ती जा रही है कि विकसित देश कोविड-19 टीकों की जमाखोरी कर रहे हैं। अभी तक देश इस मामले पर बंटे हुए हैं और यूरोपीय संघ तथा जापान जैसे कुछ विकसित देश यह कहते हुए इसका विरोध कर रहे हैं कि बौद्घिक अधिकार खत्म करने से दवा कंपनियों को मिली सुरक्षा भी खत्म हो जाएगी।
भारत भी ट्रिप्स पर एक संशोधित प्रस्ताव सौंपने की योजना बना रहा है। ट्रिप्स बौद्धिक संपदा पर बहुपक्षीय समझौता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मसले पर अमेरिका का समर्थन मिलने से दूसरे विकसित देशों पर भी दबाव पड़ेगा। डब्ल्यूटीओ में भारत के राजदूत रह चुके जयंत दासगुप्ता ने कहा, ‘अमेरिका इस कठिन घड़ी में मदद के लिए आगे आया है और एक बार फिर नेतृत्व करता दिख रहा है। यह महत्त्वपूर्ण बात है, लेकिन आगे बातचीत मुश्किल होगी। दूसरे देशों पर भी बौद्घिक सुरक्षा से छूट देने का दबाव पड़ेगा।’ डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक एंगोजी ओकोंजो-इवीला ने सदस्य देशों से भारत के प्रस्ताव को समर्थन देने की अपील की है।