जनवरी से जून के बीच देश में सौर परियोजना स्थापित करने के मामलों में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 59 फीसदी की कमी आई है। मारकोम इंडिया रिसर्च की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक कोविड के कारण लगाए लॉकडाउन से देश में इस साल अप्रैल से जून के दौरान सौर क्षमता में केवल 205 मेगावॉट का इजाफा हो सका, जबकि इसी वर्ष जनवरी से मार्च की अवधि में 1090 मेगावॉट सौर क्षमता की स्थापना हुई थी। इस प्रकार लॉकडाउन के दौरान इसमें 81 फीसदी की कमी आई।
महज दो वर्ष बद देश में अक्षय ऊर्जा की क्षमता 175 गीगावॉट करने के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को देखते हुए सौर क्षमता की स्थापना में यह गिरावट चिंताजनक है। केंद्र की लक्षित क्षमता में सौर बिजली की हिस्सेदारी 100 गीगावॉट की है जिसे 2022 तक पूरा किया जाना है।
मारकोम ने कहा, ‘अप्रैल से जून के दौरान बड़े पैमाने पर सौर क्षमता की स्थापना 120 मेगावॉट रही जबकि साल के पहले तीन महीनों में ही यह 896 मेगावॉट रही थी। 2019 में अप्रैल से जून के दौरान हुई क्षमता वृद्धि के मुकाबले बड़े पैमाने पर परियोजना लगाने में करीब 90 फीसदी की कमी आई है।’