वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने के लिए कथित रूप से फर्जी रसीद जारी करने वाले दो मुख्य अभियुक्तों और पेशेवरों सहित कम से कम 25 लोगों को पिछले 4 दिन में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में 1,180 इकाइयों के खिलाफ 350 मामले दर्ज किए गए हैं।
जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) से जुड़े सूत्रों ने कहा कि फर्जी आईटीसी दावों से जुड़ी धनराशि की गणना की जा रही है। सूत्रों ने कहा कि इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने के लिए तलाशी एवं जांच की जा रही है। साथ ही फर्जी रसीद का इस्तेमाल करने वाले लाभार्थियों की भी पहचान की जा रही है, जिन्होंने कर चोरी की है और धनशोधन में शामिल रहे हैं।
एक सूत्र ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ही लाभार्थियों की जांच कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या फर्जी रसीद जारी करने वालों और लाभार्थियों के खिलाफ विदेशी मुद्रा संरक्षण एवं तस्करी की गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (सीओएफईपीओएसए) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही नए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया को सख्त किया गया है। सूत्रों ने कहा कि जिन कारोबारों के मालिकों या प्रवर्तकों का आयकर भुगतान का रिकॉर्ड अनुरूप नहीं रहा है, उनकी कंपनियों का पंजीकरण करने के पहले भौतिक और वित्तीय जांच की जाएगी। शनिवाकर को राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह अभियान तेज किया गया है। इसमें डीजीजीआई, जीएसटी, जीएसटी नेटवर्क, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा कर बोर्ड और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इसके बाद संदिग्ध कंपनियों के खिलाफ डायरेक्टरेट जनरल आफ एनलटिक्ट ऐंड रिस्क मैनेजमेंट (डीजीएआरएम), डीजीजीआई और सीबीडीटी के आंकड़ों का मिलान किया गया। इसमें नेटवर्क की पहचान के लिए जीएसटीएन और कृमि मेधा उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। इन आंकड़ों को डीजीजीआई की जोनल इकाइयों और सेंट्रल जीएसटी जोन के प्रधान मुख्य आयुक्तों के साथ साझा किया गया। इसके बाद दिल्ली, बेंगलूरु, मुंबई, लुधियाना, चेन्नई, नागपुर, कोलकाता, गुरुग्राम, जींद, बल्लभगढ़, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, भिलाई, जोधपुर, हैदराबाद, मथुरा, रायपुर, विशाखापत्तनम के अलावा अन्य शहरों में कार्रवाई की गई।