अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप की H-1B वीजा फीस बढ़ोतरी पर बड़ा विरोध, 19 राज्यों ने दायर किया मुकदमा

कैलिफोर्निया समेत 19 अमेरिकी राज्य H-1B वीजा पर $1 लाख फ़ीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करने जा रहे हैं।

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- December 13, 2025 | 11:15 AM IST

H-1B visa fee: कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स के नेतृत्व में 19 अमेरिकी राज्य ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में नई H-1B वीजा एप्लिकेशन पर $1 लाख की फीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए मुकदमा दायर करने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार यह मुकदमा आज मैसाचुसेट्स के फेडरल कोर्ट में दाखिल किया जा सकता है।

H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को उच्च-कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की अनुमति देता है, खासकर टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में। हाल ही में घोषित $1 लाख की फ़ीस को न केवल अत्यधिक माना जा रहा है बल्कि इसे अवैध भी बताया गया है।

राज्यों का तर्क:

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि प्रशासन के पास इतनी बड़ी अतिरिक्त फ़ीस लगाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि “कांग्रेस ने कभी भी राष्ट्रपति को इस तरह का छह अंकों का शुल्क लगाने का अधिकार नहीं दिया, जो पूरे प्रोग्राम को खत्म करने जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस फीस से उन नियोक्ताओं पर भारी वित्तीय दबाव पड़ेगा जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करते हैं।

मैसाचुसेट्स की अटॉर्नी जनरल एंड्रिया जॉय कैंपबेल ने कहा कि यह फ़ीस मनमानी है और कांग्रेस द्वारा तय सीमाओं से अधिक है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने चेतावनी दी कि यह बढ़ोतरी “स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कठिन कर देगी, बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी और हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।”

कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क के अलावा इस मुकदमे में शामिल अन्य राज्य हैं: एरिज़ोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनॉइस, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नॉर्थ कैरोलिना, न्यू जर्सी, ओरेगन, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वॉशिंगटन और विस्कॉन्सिन।

पहले के कानूनी विवाद:

यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन के H-1B वीज़ा फ़ीस बढ़ोतरी के खिलाफ अब तक का तीसरा बड़ा कानूनी कदम है। अक्टूबर में अमेरिकी चेंबर ऑफ कॉमर्स, यूनियनों और एक वैश्विक नर्सिंग एजेंसी ने भी इसके खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जो अभी भी चल रहा है।

फ़ीस बढ़ोतरी और कंपनियों पर असर:

वर्तमान में H-1B वीजा की फीस $2,000 से $5,000 के बीच है। इस फ़ीस को $1 लाख तक बढ़ाने से टेक्नोलॉजी कंपनियों को चिंता है। इस प्रोग्राम पर निर्भर कंपनियों में एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, मेटा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

व्हाइट हाउस का पक्ष:

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने इस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि यह “H-1B प्रोग्राम में सुधार की दिशा में पहला कदम है।” उन्होंने बताया कि इस कदम से अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, सिस्टम के दुरुपयोग को रोका जाएगा और अमेरिकी वेतन प्रतिस्पर्धा को बनाए रखा जाएगा, जबकि विदेशी कुशल कर्मचारियों की भर्ती की सुविधा बनी रहेगी।

राज्यों ने चेतावनी दी है कि इस बढ़ोतरी से स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की भर्ती मुश्किल हो सकती है, जिससे लाखों अमेरिकियों को सेवाओं में बाधा का सामना करना पड़ सकता है।

First Published : December 13, 2025 | 11:04 AM IST