facebookmetapixel
Ultratech Cement Q3 Results: इंडिया सीमेंट और केसोराम के मर्जर का दिखा असर, मुनाफा 27% उछलाKotak Mahindra Bank Q3 Results: मुनाफा 5% बढ़कर ₹4,924 करोड़ पर, होम लोन और LAP में 18% की ग्रोथमध्य-पूर्व में जंग की आहट? कई यूरोपीय एयरलाइंस ने दुबई समेत अन्य जगहों की उड़ानें रोकींDividend Stocks: जनवरी का आखिरी हफ्ता निवेशकों के नाम, कुल 26 कंपनियां बाटेंगी डिविडेंडDGCA के निर्देश के बाद इंडिगो की उड़ानों में बड़ी कटौती: स्लॉट्स खाली होने से क्या बदलेगा?रूसी तेल की खरीद घटाने से भारत को मिलेगी राहत? अमेरिका ने 25% टैरिफ हटाने के दिए संकेतBudget 2026: विदेश में पढ़ाई और ट्रैवल के लिए रेमिटेंस नियमों में बदलाव की मांग, TCS हो और सरलघर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं? RBI की दर कटौती के बाद जानें कहां किस रेट पर होम लोन मिल रहा हैदिल्ली में बारिश, पहाड़ों पर बर्फबारी: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज, पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई ठंडGDP गणना में होगा ऐतिहासिक बदलाव: नई QNA सीरीज अगले महीने से लागू, आंकड़ों में आएगी सटीकता

श्रीलंका का विवादास्पद ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक बना कानून, विपक्ष ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन

नए कानून से ऑनलाइन सुरक्षा आयोग की स्थापना होगी जिसे अपराधों पर दंडात्मक निर्णय लेने की शक्तियां दी गई हैं।

Last Updated- February 01, 2024 | 6:39 PM IST
Sri Lanka's controversial online security bill becomes law, opposition says - violation of freedom of expression श्रीलंका का विवादास्पद ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक बना कानून, विपक्ष ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन

श्रीलंका की संसद ने ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के लिए गुरुवाएक विवादास्पद विधेयक का अनुमोदन किया, वहीं विपक्ष ने इसकी आलोचना करते हुए दावा किया है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करेगा।

संसद के संचार कार्यालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि स्पीकर महिंदा यापा अबेयवर्धने ने हस्ताक्षर कर विधेयक को प्रमाणित किया। अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर, इस विधेयक को प्रमाणित न करने की मांग के बावजूद स्पीकर ने इस पर हस्ताक्षर किया।

संसद ने पिछले सप्ताह संशोधनों के साथ इस विधेयक को मंजूरी दी थी। नए कानून से ऑनलाइन सुरक्षा आयोग की स्थापना होगी जिसे अपराधों पर दंडात्मक निर्णय लेने की शक्तियां दी गई हैं।

ऑनलाइन मंचों पर झूठे बयान देने के दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच साल की कैद या अधिकतम पांच लाख श्रीलंकाई रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक की कड़ी आलोचना की गई और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने वाला बताया गया है।

विपक्ष ने एशियाई इंटरनेट गठबंधन (एआईसी) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह विधेयक विदेशी निवेश को आमंत्रित करने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न करेगा। विपक्ष ने सत्ता में आने पर इसे निरस्त करने का भी वादा किया।

एआईसी ने कहा था कि प्रस्तावित कानून बड़ी चुनौतियां पेश करता है जिसका अगर हल नहीं किया गया तो श्रीलंका की डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावित वृद्धि प्रभावित हो सकती है। श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने विधेयक के कुल 57 उपबंधों में से कम से कम 31 में संशोधन करने का फैसला सुनाया था।

First Published - February 1, 2024 | 6:39 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट