अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप का नया ऐलान: चार-पांच हफ्तों तक जारी रह सकती है जंग, क्या पूरे खाड़ी देशों में फैलेगी बारूद की आग?

खामेनेई की हत्या के बाद ईरान-इजरायल जंग तेज हो गई है। ट्रंप की चेतावनी और हिजबुल्लाह के युद्ध ऐलान ने मध्य पूर्व में भारी तनाव पैदा कर दिया है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 03, 2026 | 5:53 PM IST

मध्य पूर्व की धरती इन दिनों बारूद की तरह सुलग रही है। अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर लगातार हमले हो रहे हैं और ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं हट रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वो चार से पांच हफ्तों के अनुमानित समय से कहीं ज्यादा लंबे समय तक लड़ाई जारी रख सकता है। ये बयान ऐसे वक्त आया है जब तेहरान में रात भर धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं। शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बमबारी तेज कर दी है।

तेहरान और उसके साथी देशों ने भी पलटवार किया है। उन्होंने इजरायल, पड़ोसी खाड़ी देशों और दुनिया के तेल-गैस से जुड़े अहम ठिकानों पर हमले किए हैं। हमलों की तीव्रता इतनी ज्यादा है कि लगता है ये जंग लंबी खिंच सकती है। इजरायल और अमेरिका की तरफ से जंग के मकसद और अंत पर अलग-अलग बातें कही जा रही हैं, जिससे स्थिति और उलझ गई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज के एक इंटरव्यू में जंग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान नए ठिकाने बना रहा है, जहां से उसके बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु बम प्रोग्राम को कुछ महीनों में ही मजबूत कर सकता है। हालांकि, उन्होंने कोई सबूत नहीं दिए।

एसोसिएटेड प्रेस की तरफ से सैटेलाइट फोटो की स्टडी की गई, जिसमें ईरान के दो परमाणु साइटों पर ज्यादा हलचल नहीं दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शायद तेहरान जून में हुए अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान का आकलन कर रहा है और बचे हुए सामान को बचाने की कोशिश में लगा है। इस बीच, दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और कई देश अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।

तुर्की की तरफ से शांति की अपील

तुर्की इस जंग को लेकर काफी चिंतित है और लगातार शांति की बात कर रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने सोमवार देर शाम पत्रकारों से बातचीत में फिर से अपील की कि हमले रुकें और बातचीत का रास्ता अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी मुख्य मांग साफ हैकि दोनों तरफ से हमले फौरन बंद हों और कूटनीति शुरू हो। फिदान ने बताया कि तुर्की दूसरे नेताओं से बातचीत में यही संदेश दे रहा है।

ईरान की तरफ से खाड़ी देशों की सुविधाओं पर हमलों पर टिप्पणी करते हुए फिदान ने कहा कि ईरान को लगता है कि इन देशों से अमेरिका पर दबाव बनेगा और जंग रुक जाएगी। लेकिन उनका मानना है कि ऐसा होना मुश्किल लगता है। तुर्की की ये अपील ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है, और कई देश डर रहे हैं कि ये जंग फैल सकती है।

Also Read: क्या खत्म हो गया महंगे हथियारों का दौर? यूक्रेन-ईरान की जंग ने कैसे बदल दिया हथियार बनाने का पूरा खेल

इटली में फंसे नागरिकों की घर वापसी की कोशिशें

इटली सरकार अपने नागरिकों को मध्य पूर्व से निकालने के लिए दिन-रात एक कर रही है। मंगलवार को सरकार ने बताया कि वो नॉन-स्टॉप काम कर रही है ताकि फंसे हुए इटालियंस को सुरक्षित घर लाया जा सके। दो फ्लाइट्स का इंतजाम किया गया है जिसमें एक मस्कट, ओमान से रोम के फ्यूमिसिनो एयरपोर्ट के लिए, जिसमें करीब 300 लोग सवार होंगे। दूसरी अबू धाबी से मिलान के लिए, जिसमें लगभग 200 लोग, ज्यादातर युवा छात्र, आएंगे।

इसके अलावा, दो और फ्लाइट्स अबू धाबी से मिलान और रोम के लिए दोपहर में रवाना होंगी, जबकि बुधवार को मस्कट से एक और फ्लाइट का प्लान है। इस बीच, इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो को लेकर घरेलू राजनीति में हंगामा मचा हुआ है। वो अपनी फैमिली के साथ दुबई में फंस गए थे जब अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू हुए। रविवार को वो मिलिट्री एयरक्राफ्ट से रोम लौटे।

विपक्षी पार्टियां, खासकर लेफ्ट-विंग वाले, उनकी इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंत्री बिना जानकारी के संकट वाले इलाके में अकेले गए। लेकिन प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सोमवार को मंत्री का बचाव किया और कहा कि उन्होंने अपना काम कभी नहीं रोका।

रोमानिया के तीर्थयात्रियों की डरावनी कहानी

रोमानिया के पर्यटक मंगलवार तड़के बुखारेस्ट पहुंचे, जो इजरायल से काहिरा होते हुए लौटे। ये लोग जंग छिड़ने से पहले इजरायल घूमने गए थे। सैकड़ों रोमानियन ऑर्थोडॉक्स चर्च के तीर्थयात्री बेथलेहम जा रहे थे, जहां रोमानियन पादरियों का ग्रुप लीड कर रहा था। लेकिन जंग शुरू होते ही ट्रिप कैंसल करनी पड़ी।

एक तीर्थयात्री मारियाना मुइकारू ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि इजरायल में रॉकेट्स आसमान में उड़ते देख वो डर गईं। उन्होंने कहा, “हमने रात 3 बजे अपने बच्चों को फोन किया, माफी मांगी क्योंकि हमें लगा कि हम मर सकते हैं। हमने उन्हें बताया कि हम उनसे प्यार करते हैं और शायद ये हमारा आखिरी वक्त है।” ये कहानी बताती है कि आम लोग इस जंग में कितने डरे हुए हैं।

रूस की मध्यस्थता की कोशिश

क्रेमलिन ने मंगलवार को कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खाड़ी देशों के नेताओं की चिंता ईरान तक पहुंचाएंगे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पत्रकारों से कहा कि पुतिन तनाव कम करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और सऊदी अरब के नेताओं से बातचीत के बाद, पुतिन उनकी गहरी चिंता- खासकर उनके इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरानी हमलों की- को तेहरान तक पहुंचाएंगे।

पेसकोव ने जोर दिया कि पुतिन कम से कम थोड़ी राहत दिलाने की कोशिश करेंगे। रूस की ये भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वो ईरान का करीबी सहयोगी है, लेकिन खाड़ी देशों से भी रिश्ते बनाए रखना चाहता है।

हिजबुल्लाह का जंग का ऐलान

हिजबुल्लाह के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि ग्रुप अब इजरायल के साथ खुली जंग लड़ेगा। मोहम्मद कोमाती ने मंगलवार को बयान दिया कि नवंबर 2024 में इजरायल-हिजबुल्लाह जंग खत्म होने के बाद से सीजफायर का पालन किया, लेकिन इजरायल के हमले जारी रहे। ग्रुप ने धैर्य रखा, उम्मीद की कि लेबनानी सरकार की डिप्लोमेसी से कुछ फायदा होगा।

हिजबुल्लाह के मीडिया ऑफिस से जारी बयान में कोमाती ने लेबनानी सरकार की आलोचना की, जो हिजबुल्लाह की कार्रवाइयों को गैरकानूनी बता रही है और हथियार सौंपने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इजरायल के लगभग रोजाना हमलों को रोकने के लिए कुछ नहीं किया। कोमाती ने कहा, “जियोनिस्ट दुश्मन खुली जंग चाहता है, जो सीजफायर के बाद से नहीं रुकी। तो अब खुली जंग हो।” ये ऐलान बताता है कि लेबनान में भी स्थिति बिगड़ सकती है।

First Published : March 3, 2026 | 5:53 PM IST