उद्योग

महंगे होंगे एसी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन: कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई कंपनियों की चिंता

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तांबे, एल्युमीनियम और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से एसी और फ्रिज जैसे उपकरणों के महंगे होने के आसार हैं

Published by
अक्षरा श्रीवास्तव   
Last Updated- March 03, 2026 | 10:28 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर कई टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। यह तब हो रहा है जबकि तांबे और एल्युमीनियम जैसी जिंस की कीमत पहले ही बढ़ रही है। इनका इस्तेमाल एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, रेफ्रीजरेटर आदि के निर्माण में किया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तांबे की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में 25 फीसदी का इजाफा हुआ और एल्युमीनियम की कीमतें भी अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं। इसका कच्चे माल पर नकारात्मक असर हो रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रुपये के मूल्य में गिरावट भी इनकी लागत बढ़ाएगी।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेस कारोबार के कारोबार प्रमुख और कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, ‘प​श्चिम ए​शिया में भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक जिंस बाजार पर नजर आने लगा है। भारत कच्चे तेल का बहुत बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते मंगाता है और क्षेत्र में बढ़ता तनाव कीमतों में उतारचढ़ाव पैदा कर सकता है। बीते केवल दो दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 10 फीसदी से अधिक बढ़ गईं जबकि रुपये में 0.6 फीसदी गिरावट आई।’

उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर कच्चे माल की कीमतों में इजाफे के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा, ‘कच्चे तेल की ऊंची कीमत के कारण पॉलिप्रोपीलीन, स्टीरीन मोनोमर और एबीएस जैसे जरूरी कच्चे माल की लागत बढ़ती है।’ ये सभी तत्व रेफ्रीजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर समेत कई उपकरणों के लिए जरूरी हैं।

यद्यपि मौजूदा घटनाक्रम का प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है लेकिन ब्लूस्टार के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन ने कहा कि सबसे पहले यह देखना होगा कि लागतें कैसे बढ़ेंगी और मांग पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘इस संदर्भ में हमें देखना होगा कि गर्मियों की मांग, जिसका हम सभी इंतजार कर रहे थे, बनी रहती है या नहीं। अब किस तरह की वृद्धि दिखाई देती है, इसका आकलन करना होगा।’

कंपनियों की उम्मीद बरकरार है लेकिन लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पर भी कड़ी नजर है। गोदरेज के नंदी ने कहा, ‘हमारा तात्कालिक ध्यान आंतरिक दक्षताओं को अनुकूलित करने पर है ताकि इन झटकों को यथासंभव सहन किया जा सके। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी बनी रहती है, तो यह निकट भविष्य में उपभोक्ता मूल्य निर्धारण पर दबाव डालेगी।’

एक अन्य अधिकारी ने गोपनयता की शर्त पर कहा, ‘हम कुछ समय से निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन भूराजनैतिक घटनाक्रम बहुत तेजी से बदले हैं और स्थिरता अभी दूर है। यह हमारे लिए दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय रणनीति बनाने में एक बाधा है।’

उन्होंने कहा कि निर्यात बढ़ाने पर तो बाद में भी विचार किया जा सकता है लेकिन मध्यम अवधि में घरेलू बाजार पर ध्यान बना रहेगा।

First Published : March 3, 2026 | 10:28 PM IST