facebookmetapixel
Advertisement
Infosys Q1 Results: अनिश्चित वैश्विक माहौल से इन्फोसिस ने घटाया ग्रोथ आउटलुक, मुनाफा 12.2% बढ़ासुधारों में देरी से अधर में लटक जाएगा हमारे युवाओं का भविष्य: मोंटेक सिंह आहलुवालिया1991 के आर्थिक सुधारों के 35 साल: उपलब्धियां बड़ी, लेकिन अधूरे एजेंडे अब भी भारत के सामनेफूड डिलिवरी बाजार में उतरेगी फ्लिपकार्ट, अगस्त-सितंबर में ONDC के जरिए होगी शुरुआतसरकार ने ई-कॉमर्स FDI नियमों में दी बड़ी राहत, निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मंजूरीInfosys में नेतृत्व परिवर्तन: आशिष कुमार दास होंगे नए सीईओ, 1 अप्रैल 2027 से संभालेंगे कमानतेल में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका, सोना 2 फीसदी टूटाहूती हमलों से तेल बाजार में उथल-पुथल, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचाकच्चे तेल में उछाल से शेयर बाजार की बिगड़ी चाल, सेंसेक्स 364 अंक टूटाSEBI का बड़ा प्रस्ताव: ऑनलाइन विवाद निपटान प्रणाली होगी तेज, MII संभालेंगे ओडीआर की जिम्मेदारी

भारत की हथियारों के आयात में निर्भरता पर पड़ सकता है असर

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 8:21 PM IST

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने सेना पर किए जाने वाले खर्च और हथियारों की खरीद को केंद्र में ला दिया है। अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। अगर प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला करने से जुड़े अधिनियम के प्रावधान लागू किए जाते हैं तब यह भारत की रूस से आगे रक्षा खरीद करने की क्षमता में बाधा डालेगा।
फिलहाल, भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वालों देशों में से एक है। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2016 से 2020 के बीच, भारत ने सेना पर 331.8 अरब डॉलर खर्च किए जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.6 फीसदी है।
हालांकि चीन ने भारत की तुलना में तीन गुना अधिक खर्च किया लेकिन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात के लिहाज से इसने सेना पर केवल 1.7 प्रतिशत खर्च किया है। हालांकि, भारत के रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा अन्य देशों से हथियारों के आयात में चला गया। भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा है और उसने 2017-21 में चीन की तुलना में लगभग दोगुना खर्च किया है। भारत के हथियारों के आयात को टक्कर देने वाला एकमात्र अन्य देश सऊदी अरब था।
आगे के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि भारत का हथियार आयात, कुल आयात के अनुपात के रूप में बढ़ रहा है। 2021 में, वैश्विक हथियारों के आयात में देश का योगदान 17.2 प्रतिशत था और 30 सालों में इसकी दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। 2013 में, पांच आयातित हथियारों में से एक में भारत का योगदान था। देश डेढ़ दशक पहले तक रूस पर बहुत अधिक निर्भर था लेकिन अब भारत के आयात में इसकी हिस्सेदारी में कमी आई है।
हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध अभी भी चिंता का विषय हैं क्योंकि भारत के आयात का लगभग आधा हिस्सा रूस से आता है। इस बीच, रूस के हिस्से में कमी आने के साथ ही भारत के हथियारों के आयात में अमेरिका, इजरायल और फ्रांस की हिस्सेदारी पिछले 15 वर्षों में बढ़ी है। हालांकि, दिक्कत वाली बात यह है कि दुनिया के निर्यात में भारत की मामूली हिस्सेदारी है।
सेना पर ज्यादा खर्च करने के बावजूद, दुनिया के हथियारों के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत है। इसके विपरीत, वर्ष 2017 और 2021 के बीच इजरायल की हिस्सेदारी 2.45 प्रतिशत और चीन की हिस्सेदारी 4.61 प्रतिशत थी। इस अवधि के दौरान विश्व हथियारों के निर्यात में यूक्रेन की हिस्सेदारी भारत की तुलना में तीन गुना थी।

Advertisement
First Published - March 31, 2022 | 11:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement