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हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे में शामिल भारत

Last Updated- December 11, 2022 | 6:47 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी अगुआई वाले हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे (आईपीईएफ) में भारत के प्रवेश की औपचारिकताएं आज पूरी कर दीं। इसमें अन्य 12 देश भी शामिल हुए हैं ताकि क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे से भू-रणनीतिक मुकाबले के लिए इन देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाया जा सके। टोक्यो में क्वाड  नेताओं के सम्मेलन से पहले आईपीईएफ से जुडऩे वाले देशों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनई दारुस्सलाम, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैंंड,  फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल थे।
हालांकि आईपीईएफ की परिकल्पना करने वाले बाइडन प्रशासन ने संयुक्त बयान की भाषा में फेरबदल कर इस पहल में अन्य देशों को भी शामिल होने की मंजूरी दे दी। संयुक्त बयान में व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू करने का आह्वान नहीं किया गया। इसमें भविष्य की बातचीत के लिए सामूहिक विमर्श शुरू करने का वादा किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं संपन्नता को बढ़ाव देने के लिए आईपीईएफ को एक समावेशी और लचीला ढांचा बनाने की दिशा में काम करेगा।  
‘क्वाड’ सम्मेलन से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि 12 देश इस नई पहल का हिस्सा बन चुके हैं। बाइडन ने कहा कि इस क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अमेरिका इस ढांचे की सफलता को लेकर पूरी तरह गंभीर है और दीर्घ काल तक इस दिशा में काम करने के लिए तैयार है।
इस पहल की शुरुआत के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाने के लिए आईपीईएफ एक संयुक्त प्रयास है। उन्होंने इस क्षेत्र में आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए साझा एवं संरचनात्मक समाधान की तरफ निरंतर बढ़ते रहने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि मजबूत आपूर्ति व्यवस्था विश्वास, पारदर्शिता और एक निश्चित समयसीमा पर आधारित होनी चाहिए। मोदी ने कहा, ‘हिंद-प्रशांत को समोवशी एवं लचीला बनाने के लिए भारत सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करेगा। मेरा मानना है कि मजबूत आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विश्वास, पारदर्शित एवं समयसीमा पर आधारित होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बात का पूर्ण विश्वास है कि आईपीईएफ इन तीनों जरूरी पहलुओं को मजबूती देने में सक्षम होगा और इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति एवं संपन्नता का मार्ग प्रशस्त हो पाएगा।’

First Published - May 24, 2022 | 12:29 AM IST

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