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चाबहार के बाद फरजाद बी भी भारत के हाथ से फिसला

Last Updated- December 15, 2022 | 4:49 AM IST

भारत-ईरान संबंध के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच जाने से पश्चिम एशिया के इस देश ने भारत की दो परियोजनाओं को अपने यहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसमें पहली परियोजना चाबहार बंदरगाह के दूसरे चरण का काम और दूसरी परियोजना फरजाद बी ब्लॉक का विकास है। 
ईरान अपने स्तर से ही चाबहार बंदरगाह के दूसरे चरण के तहत एक रेल संपर्क के लिए रकम मुहैया करा रहा है और उसका विकास कर रहा है, वहीं फरजाद बी ब्लॉक को विकसित करने का ठेका एक स्थानीय कंपनी को दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस ब्लॉक को विकसित करने में ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) ने धीमी प्रगति की है। 
इस मामले से करीब से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए ईरान किसी स्?थानीय तेल कंपनी से करार करने जा रहा है।
25 जनवरी, 2003 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति सैय्यद मोहम्मद खातमी ने इस महत्त्वाकांक्षी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते को नई दिल्ली घोषणापत्र नाम दिया गया था। इसके तहत दोनों देशों ने संयुक्त रूप से चाबहार बंदरगाह परिसर और चाबहार-फहरंज-बाम रेल संपर्क को विकसित करने का निर्णय लिया था।  तब से फरजाद बी ब्लॉक के साथ ही चाबहार परियोजना ऐसी थी जिसको लेकर भारत को अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक संतुलन बनाना पड़ रहा था। 2020 में हालांकि, ये दोनों परियोजनाएं भारत के हाथ से निकलती दिख रही हैं।
चाबहार बंदरगाह के पहले चरण का विकास भारत ने किया था, हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वह इसके दूसरे चरण का विकास नहीं कर सकता है। भले ही समझौते पर 2003 में हस्ताक्षर किया गया था, लेकिन ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर 628 किलोमीटर रेल लाइन विकसित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2016 में तेहरान दौरे के दौरान हुआ था। 
पूर्व जहाजरानी सचिव विश्वपति त्रिवेदी ने कहा, ‘चाबहार बंदरगाह पर पुनर्विचार 2014 में किया गया था। ईरान में भारत द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास को अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी।’
चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए दोनों देशों के बीच मई 2015 में एक आरंभिक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था। समझौते के तहत औपचारिक रूप से 10 साल के ठेके का मतलब था कंटेनर बंदरगाह टर्मिनल का क्रियान्वयन। 
कांडला बंदरगाह और जेएनपीटी को चाबहार बंदरगाह को विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी और भारतीय नौवहन निगम के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को इंडियन पोट्र्स ग्लोबल की जिम्मेदारी दी गई। यह ठेका को क्रियान्वित करने के लिए विशेष उद्देश्य वाली कंपनी थी। त्रिवेदी ने कहा कि इन दो बंदरगाहों को यह जिम्मेदारी दिए जाने की प्रमुख वजह यह थी कि उन्हें बंदरगाह के प्रबंधन में वांछित विशेषज्ञता हासिल थी। 
चाबहार रेलवे लाइन की तरह ही फरजाद-बी गैस फील्ड पर भी अमेरिकी प्रतिबंध प्रभावी है। पिछले हफ्ते नैशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (एनआईओसी) प्रबंध निदेशक मसूद करबासियन ने कहा कि गैस क्षेत्र के विकास के लिए समझौता निकट भविष्य में किया जा सकता है।
इस मामले के जानकार एक भारतीय अधिकारी ने कहा, ‘फरजाद बी पर फिलहाल कोई काम नहीं चल रहा है। ऐसा लगता है कि ईरान इसे विकसित करने के लिए किसी स्थानीय कंपनी को ठेका देने की कोशिश कर रहा है।’

First Published - July 15, 2020 | 11:57 PM IST

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