इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन | फोटो: PTI
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि नया पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट में सोमवार को अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने के बाद तीसरे चरण के दौरान गड़बड़ी आ गई और वह उड़ान पथ से भटक गया। इसरो का यह पीएसएलवी-सी62 रॉकेट रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित ईओएस-एन1 यानी अन्वेष समेत 16 उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ था। अन्वेष उपग्रह कथित रूप से सामरिक रक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ कृषि, शहरी गणना और पर्यावरण से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए धरती की तस्वीरें लेने वाला उपग्रह था खास बात यह है कि लगातार दूसरी बार पीएसएलवी मिशन नाकाम हुआ है।
इससे पहले पीएसएलवी-सी61 भी 18 मई 2025 को ईओएस-09 उपग्रह को लॉन्च करने के दौरान विफल हो गया था। उसमें भी तीसरे चरण के दौरान ही खराबी आई थी। यद्यपि इस बार कितना नुकसान हुआ, इसका आकलन अभी नहीं किया गया है। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पिछले साल रॉकेट की उड़ान नाकाम होने से इसरो को लॉन्चिंग लागत समेत 1,255 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। एक उपग्रह बनाने में लगभग 850 करोड़ रुपये की लागत आती है। एक और महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि अभी तक इसरो ने पीएसएलवी के माध्यम से 64 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, जिनमें से केवल पांच ही कक्षा में स्थापित होने में नाकाम रहे हैं। वैश्विक मानकों को देखते हुए यह बड़ी उपलब्धि है।
इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि उड़ान के तीसरे चरण के दौरान जब ‘स्ट्रैप-ऑन मोटर’ पीएसएलवी-सी62 को निर्धारित ऊंचाई तक ले जाने के लिए ‘थ्रस्ट’ प्रदान कर रहे थे, उसी समय रॉकेट में गड़बड़ी आ गई और बाद में वह उड़ान पथ से भटक गया। उन्होंने कहा कि रॉकेट में गड़बड़ी आने और उसके उड़ान पथ से भटकने के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है। इसरो के सूत्रों ने बताया कि रॉकेट के राह भटकने से 16 उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए और इन्हें स्थापित करने का मिशन अधूरा रह गया।
केंद्र में अपने संबोधन में नारायणन ने कहा, ‘पीएसएलवी चार चरणों वाला यान है, जिसमें दो ठोस और दो तरल चरण होते हैं। तीसरे चरण के अंत तक यान का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक था। हालांकि, इस चरण के पूरा होने से पहले हमें यान में गड़बड़ी दिख रही है और अंतत: यह पाया गया है कि रॉकेट उड़ान पथ से भटक गया है।’
इसरो के मुताबिक, मिशन के लिए 22.5 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद 44.4 मीटर ऊंचे चार-चरणीय रॉकेट ने तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10:18 बजे श्रहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य लगभग 17 मिनट की उड़ान के बाद प्राथमिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को 512 किलोमीटर ऊंची सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित करना था।