प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को बेंगलुरु की येलो लाइन मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। इसकी जानकारी बीजेपी सांसद और बेंगलुरु साउथ से सांसद तेजस्वी सूर्या ने रविवार को एक्स पर साझा की। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी 10 अगस्त को बेहद अहम येलो लाइन मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। बेंगलुरु के सभी नागरिकों की ओर से मैं प्रधानमंत्री का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने हमेशा हमारे शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी है।”
येलो लाइन मेट्रो से रोजाना करीब 8 लाख यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे सिल्क बोर्ड जंक्शन समेत कई व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। सूर्या ने कहा कि बेंगलुरु के ट्रैफिक संकट का एकमात्र दीर्घकालिक समाधान पब्लिक ट्रांसपोर्ट है। 10 अगस्त को उद्घाटन के साथ यह परियोजना 15 अगस्त की तय समयसीमा से पहले ही पूरी हो जाएगी।
उन्होंने इस समय पर उद्घाटन का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों को दिया। सूर्या, जो भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री 19.15 किमी लंबी येलो लाइन (आरवी रोड से बोम्मासंद्रा तक) के 16 स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे, जिसकी लागत ₹5,056.99 करोड़ है। इसके साथ ही वे 44.65 किमी लंबे बेंगलुरु मेट्रो फेज-3 की आधारशिला भी रखेंगे, जिसकी अनुमानित लागत ₹15,611 करोड़ है।
बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन अब यात्रियों के लिए नई सुविधा लेकर आई है। लगभग 19.15 किलोमीटर लंबी इस मेट्रो लाइन का निर्माण ₹5,056.99 करोड़ की लागत से किया गया है। यह लाइन आरवी रोड से बोम्मासंद्रा तक जुड़ी हुई है और इसमें कुल 16 स्टेशन हैं।
अधिकारियों के अनुसार, येलो लाइन से करीब आठ लाख यात्रियों को रोजाना फायदा होगा। इससे यातायात के दबाव में कमी आने की उम्मीद है, खासकर सिल्क बोर्ड जंक्शन और होसुर रोड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
यह कॉरिडोर विशेष रूप से बेंगलुरु के टेक्नोलॉजी हब को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक सीधा कनेक्शन है, जबकि इन्फोसिस फाउंडेशन कोनप्पना अग्रहरा स्टेशन से इन्फोसिस कैंपस और बायोकॉन हेब्बागोडी स्टेशन से बायोकॉन तक विशेष पहुंच बनाई गई है।
मेट्रो परिचालन शुरू होने के बाद दक्षिण बेंगलुरु से इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच यात्रा समय में पीक आवर्स के दौरान सड़क मार्ग की तुलना में करीब 60% तक की बचत होने का अनुमान है। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि सड़कों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा।