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तिरुपति लड्डू विवाद के बाद अब सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद में चूहे होने का दावा, वीडियो वायरल; ट्रस्ट ने दिया बयान

वायरल हो रहे वीडियो में नीले रंग की एक ट्रे में रखे लड्डू के पैकेट चूहों द्वारा कुतरे लड्डू दिखाई दे रहे हैं। कैरेट के एक कोने में चूहे के बच्चे दिखाई दे रहे हैं।

Last Updated- September 24, 2024 | 7:13 PM IST
After the Tirupati Laddu controversy, now there is an uproar over the Prasad of Siddhivinayak Temple, the Trust gave a statement after the video went viral तिरुपति लड्डू विवाद के बाद अब सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद को लेकर बवाल, वीडियो वायरल होने के बाद ट्रस्ट ने दिया बयान

तिरुपति के लड्डू प्रसादम् को लेकर जारी विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ इस बीच मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद के पैकेट विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया में पर वायरल हो रहे एक वीडियो में श्री सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद में चूहे होने का दावा किया गया।

श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास (SSGT) ने आरोप से इनकार करते हुए इसे प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास बताया, साथ ही न्यास ने मामले की उच्च अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू कर दी है।

वायरल हो रहे वीडियो में नीले रंग की एक ट्रे में रखे लड्डू के पैकेट चूहों द्वारा कुतरे लड्डू दिखाई दे रहे हैं। कैरेट के एक कोने में चूहे के बच्चे दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वणकर ने प्रसाद की शुद्धता को लेकर जवाब दिया है। एसएसजीटी अध्यक्ष सदा सर्वंकर ने कहा कि रोजाना लाखों लड्डू बांटे जाते हैं और जिस स्थान पर वे बनाए जाते हैं, वह स्वच्छ है। वीडियो में एक गंदा स्थान दिखायी दे रहा है। मैं देख सकता हूं कि यह मंदिर का नहीं है और वीडियो कहीं बाहर बनाया गया है। हम सीसीटीवी फुटेज खंगालेंगे और जांच के लिए एक डीसीपी (पुलिस उपायुक्त) रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास- मंदिर ट्रस्ट

मंदिर ट्रस्ट की तरफ से कहा गया कि यह हमारी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास प्रतीत होता है। मंदिर यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करता है कि प्रसाद स्वच्छ स्थान पर तैयार किया जाए। घी, काजू और अन्य सामग्री पहले जांच के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की प्रयोगशाला में भेजी जाती है और वहां से स्वीकृति के बाद इस्तेमाल की जाती है। पानी की भी प्रयोगशाला में जांच करायी जाती है। तीन सरकारी अधिकारी सख्त मानकों को बनाए रखने के लिए संचालन की निगरानी करते हैं । इसका मतलब है कि हम यह सुनिश्चित करने पर पूरा ध्यान देते हैं कि श्रद्धालुओं को दिए जाने वाला प्रसाद शुद्ध हो।

स्वच्छता पर मंदिर ट्रस्ट का पूरा ध्यान

मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक गंदगी की संभावना ही नहीं है। ऐसी अस्वच्छ स्थितियों की कोई संभावना नहीं है। जब तिरुपति मंदिर का प्रसादम विवाद शुरू हुआ है, तब हमारे परिसर का भी निरीक्षण किया गया। वहां सभी सुरक्षा और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। हम प्रसाद अनुभाग में स्वच्छता का सबसे ज्यादा ध्यान रखते हैं।

गौरतलब है कि तिरुपति मंदिर में प्रसाद के तौर पर दिए जाने वाले लड्डू को लेकर जारी विवाद के बीच यह वीडियो आया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 18 सितंबर को आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती वाईएस जगनमोहन रेड्डी सरकार ने तिरुपति के लड्डू में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया।

सप्ताह भर खराब नहीं होते लड्डू

मंदिर ट्रस्ट की सचिव वीणा पाटिल ने बताया कि मंदिर में हर साल 2 करोड़ लड्डू बनाए जाते हैं। चाशनी के लिए ब्रांडेड चीनी का इस्तेमाल की जाती है।

लैब टेस्ट के मुताबिक इन लड्डुओं को 7 से 8 दिन तक रखा जा सकता है, लेकिन लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए हम एहतियातन चार दिन में ही खाने की सूचना पैकेट पर लिखते हैं। 50 -50 ग्राम के दो लड्डू पैकेट में होते हैं। इसके अलावा फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट भी लड्डू में इस्तेमाल होने वाली चीजों की जांच करता है। ठेकेदार का टेंडर मंजूर होने से पहले उसके बनाए लड्डू का सैम्पल टेस्ट होता है।

First Published - September 24, 2024 | 7:13 PM IST

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