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साल के अंत तक शुरू होगा रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन, चार राज्यों में बनेंगे प्रसंस्करण पार्क

आयात निर्भरता घटाने और घरेलू वैल्यू चेन मजबूत करने की दिशा में कदम; ओडिशा, आंध्र, महाराष्ट्र और गुजरात में क्रिटिकल मिनरल पार्क की योजना

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साकेत कुमार   
Last Updated- February 20, 2026 | 9:29 AM IST

भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (आरईपीएम) का घरेलू उत्पादन शुरू कर देगा। साथ ही 4 राज्यों में समर्पित महत्त्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क स्थापित किए जाएंगे। खनन मंत्री जी किशन रेड्डी ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि रणनीतिक खनिजों की पूर्ण घरेलू मूल्य श्रृंखला बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

फिक्की के एक कार्यक्रम में बोलते हुए रेड्डी ने कहा कि परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा विनिर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण है। इसका उत्पादन पहली बार भारत में किया जाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा विनिर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, जिनका उत्पादन पहली बार भारत में किया जाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। पिछले साल नवंबर में मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई आरईपीएम योजना से इसे समर्थन मिल रहा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के अपने बजट भाषण में कहा था कि केंद्र सरकार ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाएगी, जिसका ध्यान रणनीतिक खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण पर केंद्रित होगा।
रेड्डी ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में महत्त्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की, जिसमें गुजरात ने पहले ही काम शुरू कर दिया है। इन पार्कों का उद्देश्य घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि महत्त्वपूर्ण खनिजों का निर्यात कच्चे माल के रूप में न किया जाए, बल्कि भारत के भीतर ही इसका प्रसंस्करण किया जाए।

रेड्डी ने कहा, ‘कच्चा माल हासिल करने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं और उस कच्चे माल का निर्यात किया जाता है। हमें इसे रोकना होगा। हमें इसका प्रसंस्करण करना होगा। यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।’ उन्होंने कहा कि केंद्र जल्द ही ओडिशा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रसंस्करण संयंत्रों के विचार पर चर्चा करने जा रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बगैर मूल्यवर्धन के कोई कच्चा माल बाहर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक केंद्रित होने से बचने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यह नीतिगत बदलाव चीन द्वारा पिछले साल आरईपीएम के निर्यात पर अंकुश लगाने के बाद आया है।

इसी कार्यक्रम में बोलते हुए कनाडा के मंत्री (वाणिज्यिक) एड जेगर ने कहा कि कनाडाई कंपनियां महत्त्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला में भारतीय फर्मों के साथ सक्रिय रूप से संयुक्त उद्यम और निवेश साझेदारी की तलाश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि कनाडा अपने 2 अरब कनाडियन डॉलर के क्रिटिकल मिनरल्स सॉवरिन फंड के साथ विदेशी निवेश आमंत्रित करने को तैयार है, जिससे कनाडा में अपस्ट्रीम संपत्तियों की खोज कर रही भारतीय कंपनियों के लिए एक अवसर पैदा हो रहा है। जेगर ने यह भी कहा कि कनाडा ने 2024 में भारत को 2 अरब डॉलर से अधिक के खनिजों और धातुओं का निर्यात किया और भारत के बढ़ते इस्पात क्षेत्र का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक मेटलर्जिकल कोयला आपूर्ति साझेदारी का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने भारतीय कंपनियों को टोरंटो में कनाडा के प्रोस्पेक्टर्स ऐंड डेवलपर्स एसोसिएशन (पीडीएसी) के आगामी सम्मेलन में कनाडाई फर्मों के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है।

First Published : February 20, 2026 | 9:29 AM IST