ऑडिट और सलाहकार फर्म डेलॉयट टौचे तोमात्सु का कहना है कि भारत अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक नई डेटा सेंटर क्षमता निर्माण में 200 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करेगा। यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में किए जाने वाले 800 अरब डॉलर के निवेश का बड़ा हिस्सा है।
डेलॉयट के एशिया प्रशांत प्रमुख (क्लाइमेट ऐंड सस्टनैबिलिटी) विल सिमोन्स ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, यह इस क्षेत्र और भारत के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक अवसर है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले चार वर्षों में भारत में 8-10 गीगावॉट की डेटा सेंटर क्षमता का निर्माण होगा, लेकिन इसके लिए भारत को पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
कंपनी ने डेटा सेंटर में आई उछाल पर आज एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि भारत का बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा आधार और स्वच्छ ऊर्जा, डेटा सेंटर के विकास के अगले चरण को मदद देने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। लेकिन ऊर्जा आपूर्ति में कोई कमी न रहे, इसके लिए बिजली उत्पादन को भी उसी अनुपात में बनाए रखना होगा।
इसमें कहा गया है कि उच्च विकास वाले क्षेत्रों में ग्रिड स्थिरता की सीमाएं और सीमित सबस्टेशन क्षमता इस योजना के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके अलावा ट्रांसमिशन अपग्रेड के लिए लंबी समयसीमा है और डेटा केंद्रों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने में मददगार राष्ट्रीय ढांचे की कमी भी एक समस्या है।
डेलॉयट के पार्टनर अनीश मंडल ने कहा, भारत में अगले चार-पांच वर्षों में होने वाले अनुमानित 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश का सारा हिस्सा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि अकेले डेटा सेंटर ही 2030 तक इन सभी राज्यों में से हरेक में बिजली की पीक अवधि की मांग में 10 फीसदी से अधिक का योगदान देंगे। अगर वे नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होते हैं तो ग्रिड अस्थिरता से बचने के लिए देश को खासी विश्वसनीय बिजली प्रणाली योजना की जरूरत होगी।
विश्व के डेटा उपभोग में भारत का योगदान 20 फीसदी है। लेकिन विश्व के डेटा केंद्रों में से केवल 5 फीसदी से भी कम भारत में हैं। भारत में डेटा केंद्रों के विकास के प्रमुख कारकों में सॉवरिन डेटा, एआई के बढ़ता उपयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार, एंटरप्राइज क्लाउड में वृद्धि और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी) जैसे नियामकीय अनुपालन शामिल हैं।
2026-27 के केंद्रीय बजट में भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली और वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार ने डेटा सेंटर विकास को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए तरजीही कर व्यवस्था की भी घोषणा की है।
रिपोर्ट में कहा गया है, इन उपायों में भारत और भारत से बाहर डिजिटल मांग की पूर्ति के लिए वैश्विक कंपनियों से महत्त्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने की क्षमता है। इसके अतिरिक्त, भारत को निर्माण लागत, भूमि दरों और बिजली शुल्क में कमी और एआई-कुशल कार्यबल की उपलब्धता के मामले में संरचनात्मक लाभ हासिल हैं।