इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के अनुसार, कैंसर की दवा रेवलिमिड के जेनेरिक संस्करणों के कम योगदान के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बाजार में भारत के दवा क्षेत्र की वृद्धि मध्यम रहने का अनुमान है।
यह सब तब हो रहा है जब रेटिंग एजेंसी ने भारतीय दवा निर्माताओं के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 10 फीसदी राजस्व वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो मजबूत घरेलू बिक्री और अनुबंध विकास और विनिर्माण संगठन (सीडीएमओ) कारोबार में बढ़ती रुचि से प्रेरित है।
डॉ. रेड्डीज़, सिप्ला और सन फार्मा जैसी कंपनियों ने जनवरी 2026 में जी-रेवलिमिड के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वॉल्यूम प्रतिबंधित समझौतों के कारण अमेरिकी बाजार में धीमी वृद्धि दर्ज की है।
इन कंपनियों ने रेवलिमिड के आविष्कारक माइलन के साथ समझौता किया था, जिसके तहत उन्हें 2022 से लेकर पिछले महीने पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने तक सीमित मात्रा में दवा बेचने की अनुमति मिली थी। हालांकि यह दवा इन कंपनियों के लिए राजस्व और लाभ का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है, लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान बाकी स्टॉक की बिक्री में गिरावट आने का अनुमान है। फिर भी अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के रेटिंग वाली फार्मा कंपनियों के लिए राजस्व का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, जो कुल राजस्व का करीब 35 फीसदी है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच कवरेज क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई (औसतन 10.7 फीसदी की सालाना वृद्धि) जबकि वित्त वर्ष 2018 से वित्त वर्ष 2022 में औसत वृद्धि 1 फीसदी रही थी। यह वृद्धि उत्पाद विशिष्ट अवसरों (जिनमें विशेष दवाओं की शुरुआत और रेवलिमिड और मिराबेग्रोन जैसी प्रमुख जेनेरिक दवाएं शामिल हैं) अमेरिकी बाजार में दवाओं की कमी और कीमत पर दबाव में नरमी के कारण हुई।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को फार्मा निर्यात पर शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता रहेगा क्योंकि घरेलू उत्पादन क्षमता सीमित होने के कारण अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है।
रेटिंग एजेंसी के सहायक निदेशक और हेल्थकेयर के सह-प्रमुख कृष्णनाथ मुंडे ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, धारा 232 के तहत जांच जारी रहने के बावजूद किसी अंतिम परिणाम से अमेरिकी बाजार में भारतीय फार्मा कंपनियों की साख पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, जो प्रमुख भारतीय दवा निर्माताओं के कुल राजस्व में करीब 35 फीसदी का योगदान देता है।
दूसरी ओर, विश्लेषकों का अनुमान है कि दवा की कीमतों में वृद्धि और नए उत्पादों के लॉन्च के कारण वित्त वर्ष 2027 में घरेलू फार्मा बाजार में सालाना आधार पर 9 फीसदी की वृद्धि होगी, हालांकि वॉल्यूम में वृद्धि धीमी रह सकती है।