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एक साल में सड़क हादसे में 173,000 मौतें! भारत में एक्सीडेंट का खौफनाक आंकड़ा, दिल्ली में सबसे ज्यादा गई जानें

रिपोर्ट बताती है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों को है, जो कुल मौतों का 44.8 फीसदी हिस्सा हैं। इसके बाद पैदल यात्रियों की संख्या आती है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- August 29, 2025 | 7:24 PM IST

भारत में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट ‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया 2023’ के मुताबिक, देश में हर तीन मिनट में एक व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हुई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में कुल 1,73,000 लोगों ने सड़कों पर अपनी जान गंवाई, जो 2022 की तुलना में 2.6 फीसदी ज्यादा है। साथ ही, हादसों में घायल होने वालों की संख्या 4.6 लाख से ज्यादा रही, जो पिछले साल से 4.4 फीसदी अधिक है।

दिल्ली और बेंगलुरु में सबसे ज्यादा मौतें

दिल्ली 2023 में सड़क हादसों से होने वाली मौतों के मामले में सबसे ऊपर रही। यहां 5,834 हादसों में 1,457 लोगों की जान गई, जो लगातार दूसरा साल है जब दिल्ली इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। वहीं, बेंगलुरु 915 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जो पिछले साल भी दूसरे नंबर पर था। अगर राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 67,213 हादसे हुए, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 23,652 लोगों की मौत हुई।

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पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों का खतरा

रिपोर्ट बताती है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों को है, जो कुल मौतों का 44.8 फीसदी हिस्सा हैं। इसके बाद पैदल यात्रियों की संख्या आती है, जिनका हिस्सा 20.4 फीसदी रहा। 2023 में 35,221 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जो 2022 के 32,825 की तुलना में 7.29 फीसदी ज्यादा है। हल्के मोटर वाहनों के यात्रियों और साइकिल सवारों को भी काफी जोखिम रहा। खासकर 18 से 45 साल के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जो कुल मौतों का 66.4 फीसदी हैं। 18 से 60 साल की उम्र के लोग 83.4 फीसदी हादसों का शिकार बने।

हेलमेट न पहनने की कीमत

दोपहिया वाहनों से होने वाली मौतों में हेलमेट न पहनना बड़ा कारण रहा। 2023 में 54,568 लोगों की मौत हेलमेट न पहनने की वजह से हुई। इनमें 71.8 फीसदी (39,160) चालक थे और 28.2 फीसदी (15,408) सवारी करने वाले।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, 68.5 फीसदी मौतें ग्रामीण इलाकों में हुईं, जबकि 31.5 फीसदी शहरी क्षेत्रों में। देश के नेशनल और स्टेट हाईवे, जो कुल सड़क लंबाई का सिर्फ 5 फीसदी हैं, वहां आधे से ज्यादा हादसे और मौतें हुईं।

(रिपोर्ट: बोरिस प्रधान)

First Published : August 29, 2025 | 7:24 PM IST