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Liquor Policy Case: गिरफ्तारी के फैसले के खिलाफ Supreme Court पहुंचे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल

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अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जुटाई गई सामग्री से पता चलता है कि केजरीवाल ने साजिश रची और वह आबकारी नीति तैयार करने में शामिल थे।

Last Updated- April 10, 2024 | 10:22 AM IST
केजरीवाल की जमानत का मामला, फैसला सुरक्षित रखना असामान्य, Kejriwal's bail case, keeping the decision reserved is unusual

दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal मे गिरफ्तारी के मामले में राहत न मिलने पर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अरविंद केजरीवाल हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं, जिसमें हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।लबता दें, केजरीवाल को 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने उत्पाद शुल्क नीति मामले में गिरफ्तार किया था।

इससे पहले मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि केजरीवाल की गिरफ्तारी ने कानून का उल्लंघन नहीं किया और रिमांड सहित इसे “अवैध” नहीं माना जा सकता।

ये भी पढ़ें- ‘गिरफ्तारी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं’…हाई कोर्ट ने खारिज की CM केजरीवाल की याचिका; जानें अब तक क्या-क्या हुआ
इस बीच, एएनआई ने बताया कि दिल्ली के सीएम के वकील, एडवोकेट ऋषिकेश कुमार ने कहा कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के योग्य है और इसे चुनौती देना उनके अधिकार क्षेत्र में है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, कुमार ने कहा, “हमने अरविंद केजरीवाल की अवैध गिरफ्तारी को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि रिमांड आदेश कानूनी है और दूसरी बात, उन्होंने कहा कि उनके पास गिरफ्तारी का आधार था।”

इस बीच, न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा की पीठ ने कहा, ईडी के पास पर्याप्त सामग्री थी, जिसके कारण उन्हें केजरीवाल को गिरफ्तार करना पड़ा। केजरीवाल के जांच में शामिल न होने और उनके द्वारा की गई देरी का असर न्यायिक हिरासत में बंद लोगों पर भी पड़ रहा था।

ये भी पढ़ें- दिल्ली हाईकोर्ट से CM केजरीवाल को राहत नहीं, ED की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका क्यों की गई खारिज?

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, ‘अदालत का मानना है कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं थी। इसलिए रिमांड को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।’

अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जुटाई गई सामग्री से पता चलता है कि केजरीवाल ने साजिश रची और वह आबकारी नीति तैयार करने में शामिल थे। सामग्री से यह भी पता चलता है कि उन्होंने आपराधिक तरीके से जुटाई गई रकम का उपयोग भी किया।

वहीं दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने दावा किया है कि उनके खिलाफ बयान देने वाले दो गवाह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हैं।

 

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First Published - April 10, 2024 | 10:04 AM IST

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