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केंद्र ने ₹79,000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों पर लगाई मुहर, तीनों सेनाओं को मिलेगा नया साजो-सामान

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार भारतीय थल सेना के जिन साजो-सामान की खरीदारी की मंजूरी दी गई है उनमें लॉइटरिंग म्यूनिशन (आसमान में मंडराने वाले हथियार) भी शामिल है

Last Updated- December 29, 2025 | 10:39 PM IST
Rajnath Singh
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह | फाइल फोटो

सरकार ने सशस्त्र बलों के लगभग 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा साजो-सामान की खरीद या उन्हें पट्टे पर लेने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। सोमवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद ने ‘आवश्यकता की स्वीकृति’को मंजूरी दे दी। ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ एक तकनीकी शब्द है जिसका अर्थ है थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए साजो-सामान (ज्यादातर घरेलू स्तर पर खरीदारी के मकसद से) के लिए सैद्धांतिक मंजूरी।

इसके अंतर्गत व्यापक स्तर पर रक्षा साजो-सामान की खरीदारी का कोई प्रावधान सुनिश्चित नहीं है क्योंकि इसके लिए अंततः सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी जरूरी होती है। रक्षा मंत्री इस समिति के सदस्य होते हैं।

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार भारतीय थल सेना के जिन साजो-सामान की खरीदारी की मंजूरी दी गई है उनमें लॉइटरिंग म्यूनिशन (आसमान में मंडराने वाले हथियार) भी शामिल हैं जिनका उपयोग सामरिक लक्ष्यों पर सटीक हमलों के लिए किया जाएगा। इनके अलावा छोटे आकार के कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मानवरहित प्रणालियों का पता लगाने और उन पर नजर रखने के लिए हल्के रडार, पिनाका प्रणाली (मल्टी बैरल लॉन्चर) के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट (इसकी सीमा और सटीक मारक क्षमता में सुधार के लिए) और घरेलू स्तर पर निर्मित एक उन्नत ड्रोन रोधी प्रणाली शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि ड्रोन का पता लगाने और उन्हें रोकने की प्रणाली एमके-2 ‘बढ़ी मारक क्षमता के साथ’ सामरिक युद्ध क्षेत्रों और अंदरूनी इलाकों में भारतीय सेना की अहम संपत्तियों की रक्षा करेगी। भारतीय नौसेना के लिए जिन साजो-सामान की स्वीकृति दी गई है उनमें बोलार्ड पुल टग की खरीद शामिल है जो जहाजों और पनडुब्बियों को किनारे लाने (बर्थिंग) एवं किनारे से दूर ले जाने और सीमित पानी या बंदरगाहों में युद्धाभ्यास करने में सहायता कर सकते हैं।

इसके अलावा उच्च-आवृत्ति वाले सॉफ्टवेयर-परिभाषित रेडियो की खरीद भी शामिल है जो बोर्डिंग और लैंडिंग परिचालन के समय लंबी दूरी के संचार को और अधिक सुरक्षित बना सकेंगे। मंत्रालय के बयान के अनुसार भारतीय नौसेना की उच्च ऊंचाई वाली लंबी दूरी की दूरस्थ संचालित विमान प्रणाली पट्टे पर लेने की आवश्यकता का भी ध्यान रखा गया ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर खुफिया, निगरानी एवं टोही और विश्वसनीय समुद्री क्षेत्र की सटीक जानकारी हासिल की जा सके।

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, अस्त्र एमके-2 मिसाइल (दृश्य सीमा से परे), फुल-मिशन सिमुलेटर और स्पाइस-1000 लंबी दूरी की मार्गदर्शन किट की खरीद को मंजूरी दी गई। स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम की मदद से लैंडिंग और टेक-ऑफ की बेहद साफ-सुथरी मौसम स्वचालित रिकॉर्डिंग प्रदान कर ‘एयरोस्पेस सुरक्षा वातावरण में कमियों की भरपाई करेगा।’ बयान में कहा गया है कि अस्त्र एमके-2 मिसाइलें अपनी बढ़ी मारक क्षमता के साथ दूर से ही प्रतिद्वंद्वी विमानों को बेअसर करने की लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ जाएगी।

बयान के अनुसार हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए फुल-मिशन सिमुलेटर लागत प्रभावी और सुरक्षित तरीके से पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाएंगे जबकि स्पाइस-1000 आईएएफ की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता में इजाफा करेंगे।

First Published - December 29, 2025 | 10:39 PM IST

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