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‘धन-धान्य योजना’ को मंत्रिमंडल की मंजूरी, 1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा फायदा

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PM Dhan Dhaanya Yojana: यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिलों की तर्ज पर बनाई गई है और इसकी घोषणा 2025-26 के केंद्रीय बजट में हुई थी।

Last Updated- July 17, 2025 | 7:31 AM IST
Farmers
Representative Image

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को आज मंजूरी दे दी। जिलों में कृषि बेहतर करने के मकसद से शुरू की जा रही इस योजना पर सालाना 24,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और कुल 100 जिले इसके दायरे में आएंगे। पहले से चल रही 36 योजनाओं को इस योजना के अंतर्गत लाया जा रहा है।

इस योजना में हर राज्य से कम से कम एक जिले को शामिल किया जाएगा। इस योजना का मकसद उन जिलों की फसलों से होने वाली उपज को, कर्ज की उपलब्धता को और दूसरे पैमानों को राष्ट्रीय स्तर के बराबर लाना है।

धन-धान्य योजना के लिए अलग से कोई धनराशि नहीं आवंटित की जाएगी और 11 मंत्रालयों के तहत पहले से चल रही 36 योजनाओं के लिए आवंटित होने वाला धन ही इसमें इस्तेमाल होगा। इसमें कृषि, खाद्य, पशुपालन व डेरी, मत्स्य पालन, वित्त, ग्रामीण विकास, सहकारिता, सिंचाई व अन्य विभागों की योजनाएं शामिल होंगी।

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यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तर्ज पर बनाई गई है, जिसकी घोषणा 2025-26 के बजट में की गई थी। धन-धान्य योजना चालू वित्त वर्ष में शुरू होकर 6 साल तक चलेगी और इससे करीब 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने का अनुमान लगाया गया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि योजना का बुनियादी मकसद कृषि उत्पादकता बढ़ाना, विविधता भरी फसलें उगाने का चलन बढ़ाना, फसल की कटाई के बाद पंचायत तथा ब्लॉक स्तर पर भंडारण बढ़ाना और लंबी तथा छोटी अवधि के लिए कर्ज आसानी से उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि 100 जिलों का चयन तीन प्रमुख मानदंडों पर किया जाएगा – फसल में कम उत्पादकता, फसल का कम घनत्व और कर्ज की औसत से कम उपलब्धता। मंत्री ने कहा कि चुने गए हरेक जिले के लिए कृषि एवं उससे जुड़ी अन्य गतिविधियों की अलग योजना तैयार की जाएगी। यह काम जिलाधिकारी के अधीन एक समिति करेगी। समिति व्यापक परामर्श भी करेगी और कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार फसल पैटर्न तथा उससे जुड़ी गतिविधियों को समझेगी। योजना की नियमित निगरानी के लिए राज्य स्तर पर समितियों और राष्ट्रीय स्तर पर एक निगरानी समिति भी गठित की जाएगी।

यह योजना नीति आयोग के मार्गदर्शन में होगी और वही इसे चलाने का काम भी करेगा। केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को हर राज्य में ज्ञान भागीदार का जिम्मा सौंपा जाएगा। नीति आयोग इस योजना के तहत चुने गए जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर वैसे ही रैंकिंग देगा जैसी आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत दी जाती है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस महीने के अंत तक 100 जिलों की पहचान कर ली जाएगी और अक्टूबर से यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की निगरानी के लिए मंत्रियों की एक समिति होगी, जबकि कार्यक्रम की समीक्षा के लिए विभिन्न विभागों से सचिवों का एक पैनल होगा। ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) के फेलो एवं निदेशक (ग्रीन इकोनॉमी एवं इम्पैक्ट इनोवेशन) अभिषेक जैन ने कहा कि प्रति हेक्टेयर वार्षिक शुद्ध कृषि आय का उपयोग करके योजना के लिए जिला चयन में सुधार किया जा सकता है।

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First Published - July 17, 2025 | 7:31 AM IST

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