प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते सप्ताह बहुप्रतीक्षित परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी। इसके जरिये सार्वजनिक दबदबे वाले उद्योग को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है। दरअसल, सरकार का लक्ष्य परमाणु ऊर्जा के लिए 2047 तक 100 गीगावॉट की क्षमता हासिल करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसे महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रमुख कदम माना जाता है। हालांकि उद्योग भारत का परमाणु ऊर्जा उद्योग बीमा नीति में संशोधन, ईंधन हासिल करने की रणनीतियां और कुशल मानव सृजन सहित महत्त्वपूर्ण सुधारों को चाहता है।
उद्योग में व्यापक भागीदारी की उम्मीद के कारण परमाणु परियोजनाओं के लिए बीमा ढांचे में संशोधन की आवश्यकता है। वर्तमान में भारतीय परमाणु बीमा पूल (आईएनआईपी) परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व (सीएलएनडी) अधिनियम 2010 के तहत परमाणु संचालकों और आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व के लिए 1,500 करोड़ रुपये का कवरेज प्रदान करता है।
उद्योग में नई कंपनियों के उतरने के कारण आईएनआईपी की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। दरअसल, ऊर्जा मंत्रालय ने उच्च स्तरीय सरकारी समिति गठित की है और यह समिति भारत में परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने के रोडमैप का समौदा तैयार करेगी।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि हॉट जोन संपत्तियों (परमाणु रिएक्टर क्षेत्रों में अत्यधिक ताप वाली संपत्तियां) को बीमा कवर प्रदान किया जाए। इससे निजी संचालकों का जोखिम बीमा कंपनियों को हस्तांतरित हो जाएगा। वर्तमान में परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए संपत्ति बीमा केवल कोल्ड जोन संपत्तियों या परमाणु रिएक्टर क्षेत्र के बाहर स्थित संपत्तियों के लिए ही उपलब्ध है।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर अनुजेश द्विवेदी ने कहा, ‘जब तक सुविधाओं का पूर्ण बीमा नहीं हो जाता, ऋणदाता संशय में रहेंगे। परमाणु संयंत्रों और परिसंपत्तियों का उचित बीमा कवर प्राप्त करने की क्षमता अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। दरअसल यह क्षेत्र अब तक बंद रहा है, इसलिए अभी इस क्षेत्र में व्यावसायिक रुचि रखने वाले संगठनों की क्षमता सीमित है।’
विशेषज्ञों ने बताया कि 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने में परमाणु ईंधन की आपूर्ति का प्रबंधन एक और प्रमुख चुनौती होगी। भारत परमाणु ईंधन के रूप में यूरेनियम-235 का उपयोग करता है। इसमें प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर्स (पीएचडब्ल्यूआर) और संवर्धित यूरेनियम का उपयोग प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर्स (पीडब्ल्यूआर) में किया जाता है। अभी देश की 8.8 गीगावॉट परमाणु क्षमता के लिए यूरेनियम की 70 प्रतिशत से अधिक मांग आयात से पूरी होती है जबकि घरेलू स्रोत केवल लगभग 2.4 गीगावॉट यूरेनियम की आपूर्ति करते हैं।
सरकारी समिति ने कहा कि 100 गीगावॉट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को यूरेनियम की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ पर्याप्त प्रसंस्करण और निर्माण क्षमता भी विकसित करने की जरूरत होगी।
द्विवेदी ने परमाणु ईंधन में थोरियम की पर्याप्त मात्रा मिलाने का सुझाव दिया। भारत में थोरियम का अच्छा भंडार है। उन्होंने कहा, ‘उन्नत परमाणु ऊर्जा संवर्धन ईंधन (एएनएईएल) के विकास की भी खबरें हैं, जो यूरेनियम व थोरियम का मिश्रण है और इसके परीक्षण पर भी विचार किया जा रहा है। यदि यह सफल होता है तो मौजूदा रिएक्टरों की यूरेनियम की आवश्यकता को कम किया जा सकता है।’
परमाणु परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन जुटाना, परियोजनाओं की समयसीमा को कम करना (जो वर्तमान में लगभग 11 से 12 वर्ष है) और कुशल मानव संसाधन का सृजन करना भारत के परमाणु क्षेत्र के सामने अन्य प्रमुख चुनौतियां हैं।