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RBI नए नियमों के जरिए कैसे भारतीयों के लिए बैंकिंग को आसान बनाने की कोशिश कैसे कर रहा है?

RBI MPC: रिजर्व बैंक ने ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने, डिजिटल फ्रॉड रोकने और MSME व बैंकों के नियम आसान करने की योजना बताई है

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रिमझिम सिंह   
Last Updated- February 06, 2026 | 4:38 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए। रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही रखा गया है, लेकिन ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने, लोन आसान बनाने और बैंकों-NBFC के नियमों में ढील देने पर जोर दिया गया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ये बदलाव आम लोगों और छोटे कारोबारियों को फायदा पहुंचाएंगे।

ग्राहकों की सुरक्षा पर खास फोकस

RBI अब ग्राहकों को धोखे से बचाने के लिए तीन नए ड्राफ्ट नियम लाने जा रहा है। पहला नियम मिस-सेलिंग पर होगा, जहां बैंक वाले गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचते हैं। दूसरा लोन रिकवरी और एजेंटों के इस्तेमाल पर, ताकि कर्ज वसूली में कोई जबरदस्ती न हो। तीसरा अनऑथराइज्ड ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में ग्राहकों की जिम्मेदारी सीमित करने पर।

इसके अलावा, छोटे-मोटे फ्रॉड में पीड़ितों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने का प्लान है। डिजिटल फ्रॉड बढ़ने की वजह से RBI एक डिस्कशन पेपर जारी करेगा, जिसमें पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित बनाने के तरीके बताए जाएंगे। जैसे, पैसे ट्रांसफर होने में थोड़ी देरी या एक्स्ट्रा चेक, खासकर बुजुर्गों के लिए।

छोटे कारोबार और रियल एस्टेट को मिलेगा ज्यादा कर्ज

छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देते हुए RBI ने बिना गारंटी वाले लोन की सीमा दोगुनी करने का प्रस्ताव रखा। अभी 10 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी सिक्योरिटी के मिलता है, अब इसे 20 लाख तक बढ़ाया जाएगा। इससे छोटे दुकानदारों और फैक्टरियों को आसानी से पैसे मिलेंगे।

रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट देने के लिए बैंकों को रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REIT) को लोन देने की इजाजत दी जाएगी, लेकिन सख्त नियमों के साथ। इससे प्रॉपर्टी मार्केट में ज्यादा फंड आएगा और डेवलपमेंट तेज होगा।

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NBFC के लिए नियमों में ढील

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को काम आसान बनाने के लिए RBI ने कुछ छूट दी। जो NBFC पब्लिक फंड नहीं लेतीं और ग्राहकों से सीधा संपर्क नहीं रखतीं, अगर उनकी एसेट्स 1,000 करोड़ से कम हैं, तो उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इसके अलावा, कुछ NBFC को 1,000 से ज्यादा ब्रांच खोलने के लिए पहले से अप्रूवल नहीं लेना होगा। गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग और NBFC दोनों सेक्टर मजबूत हैं। बैंकों की कैपिटल, लिक्विडिटी, एसेट क्वालिटी और प्रॉफिट सब ठीक चल रहे हैं। NBFC की एसेट क्वालिटी भी बेहतर हुई है।

फाइनेंशियल इनक्लूजन को मजबूत बनाना

RBI ने गांवों और कमजोर वर्गों तक बैंकिंग पहुंचाने के लिए कई स्कीम्स की समीक्षा की। जैसे लीड बैंक स्कीम (LBS), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) मॉडल। जल्द ही इनके लिए नए ड्राफ्ट नियम आएंगे।

डेटा बेहतर मैनेज करने के लिए एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग पोर्टल लॉन्च होगा, जो लीड बैंक स्कीम की जानकारी ट्रैक करेगा। इससे रूरल बैंकिंग ज्यादा प्रभावी बनेगी।

अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को ताकत

शहरी सहकारी बैंकों (UCB) को मजबूत करने के लिए चार कदम उठाए जा रहे हैं। पहले दो अनसिक्योर्ड लोन और नॉमिनल मेंबर्स को लोन की लिमिट बढ़ाने पर। इसके अलावा, टियर-3 और टियर-4 UCB के लिए हाउसिंग लोन में टेनर और मोरेटोरियम की शर्तें हटा दी जाएंगी।

गवर्नेंस और स्किल्स बेहतर करने के लिए मिशन-सक्षम शुरू होगा, जिसमें 1,40,000 से ज्यादा UCB कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

लोन रेट्स में गिरावट और क्रेडिट ग्रोथ

RBI ने बताया कि पहले के रेट कट्स का फायदा कर्ज लेने वालों को मिल रहा है। पॉलिसी रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती से नए रुपए लोन की औसत लेंडिंग रेट 105 बेसिस पॉइंट्स घटी है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सभी स्रोतों से क्रेडिट ग्रोथ सालाना 13.8 प्रतिशत है, जो पिछले साल के 11.6 प्रतिशत से ज्यादा है। इससे अर्थव्यवस्था में तेजी दिख रही है।

First Published : February 6, 2026 | 4:38 PM IST