शरद माथुर, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO), यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस
बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति और नियामक को अतिरिक्त शक्तियां दिए जाने से विदेशी निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद है। यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) शरद माथुर ने मुंबई में आतिरा वारियर के साथ साक्षात्कार में विभिन्न मसलों और कंपनी की वृद्धि योजनाओं पर बात की। प्रमुख अंश…
गैर-जीवन बीमा क्षेत्र के लिए यह वर्ष अब तक कैसा रहा है?
गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में बेहतर वृद्धि रही है। खासकर नवंबर उत्साहजनकर रहा। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) खत्म किए जाने से स्वास्थ्य बीमा में लगातार वृद्धि हुई है, जो सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड बना हुआ है। वाहन बीमा ने भी बड़ा अवसर प्रदान किया है। त्योहारी सीजन में वाहनों की बिक्री का भी लाभ मिला है।
गैर बीमित वाहनों को बीमा के दायरे में लाने के लिए क्या उद्योग या नियामक कोई ठोस कदम उठा रहे हैं?
हां। गैर बीमित वाहनों के विश्वसनीय आंकड़े न होना सबसे बड़ी चुनौती है। बीमाकर्ता राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। नियामक उचित मार्गदर्शन कर रहा है। वाहनों के आंकड़े एकत्र होने के बाद बीमाकर्ता सीधे ही गैर बीमित वाहनों के मालिकों तक पहुंचने में सक्षम होंगे।
क्या आपको लगता है कि जीएसटी में बदलाव के बाद आई तेजी पूरे साल जारी रहेगी?
अब तक वृद्धि दर लगभग 8 प्रतिशत है। हमें उम्मीद है कि मार्च तक यह दोहरे अंकों में चली जाएगी। जनवरी में नए वाहनों की बिक्री और नवीनीकरण के कारण तेजी रहेगी। वहीं जनवरी-मार्च की अवधि पारंपरिक रूप से कर संबंधी मांग के कारण स्वास्थ्य और जीवन बीमा के लिए मजबूत होती है। सकल लिखित प्रीमियम (जीडब्ल्यूपी) में स्वास्थ्य और मोटर बीमा के सबसे बड़े योगदानकर्ता होने के कारण मार्च तक वृद्धि की गति बनी रहनी चाहिए।
बीमा विधेयक के माध्यम से हुए बदलावों के, खासकर नियामक को शक्तिशाली बनाए जाने को लेकर उद्योग कैसे तैयार हो रहा है?
विधेयक एक बहुत ही सकारात्मक है। इसमें नियामक को अधिक लचीलापन दिया गया है। इससे भारत वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के करीब आया है। यह सिर्फ शक्ति बढ़ाने का मसला नहीं, बल्कि अधिक प्रभावी पर्यवेक्षण का मसला है। नियम के मुताबिक चलने वाले बीमाकर्ता प्रभावित नहीं होंगे। डिस्गॉर्जमेंट जैसे प्रावधानों का मकसद दावों के कुप्रबंधन जैसी समस्याओं को सुधारात्मक तरीके से हल करना है, न कि सजा देने के तरीके से। इसमें ढांचागत बदलावों के माध्यम से कामकाज के तरीके में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
क्या आप उम्मीद करते हैं कि विदेशी शेयरधारक अब अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगे, क्योंकि अब 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है?
भारत के बाजार में रुचि रखने वाले विदेशी बीमाकर्ता निवेश बढ़ा सकते हैं। भारत बहुत आकर्षक और उच्च वृद्धि की संभावनाओं वाला बाजार है। इसमें दीर्घकालिक क्षमता है। हालिया नीतिगत बदलाव विदेशी बीमाकर्ताओं के लिए अवसरों का पता लगाने और अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए और भी अधिक अनुकूल माहौल बना है। सोम्पो व अन्य विदेशी बीमाकर्ता स्वाभाविक रूप से विकसित हो रहे परिदृश्य का आकलन करेंगे।
कंपनी के विकास को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएं हैं? आप किन क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं?
पिछले साल हमने करीब 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया और वित्त वर्ष 2026 में 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 में कंपनी का प्रीमियम लगभग 2,500 करोड़ रुपये पर अटका हुआ था। इसमें फसल बीमा प्रीमियम, कुल प्रीमियम का 70 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हमने अब कारोबार का विविधीकरण किया है। फसल बीमा अब कुल कारोबार का केवल 8 प्रतिशत है। हम साइबर, श्योरिटी, पैरामीट्रिक और पालतू जानवरों के लिए कवर जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी काम कर रहे हैं।
क्या आप नए स्थानों, जैसे गिफ्ट सिटी में विस्तार करने की योजना बना रहे हैं?
गिफ्ट सिटी में अभी हमारा कोई कार्यालय नहीं है। यह एक विकल्प है जिस पर हम भविष्य में विचार कर सकते हैं।